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सामाजिक संस्था आर्ट ऑफ बस्ती द्धारा किया गया लोक उत्सव का कार्यक्रम

बस्ती – सामाजिक संस्था आर्ट ऑफ बस्ती द्वारा संस्कार भारती भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इण्डिया एवं बस्ती विकास समिति के सहयोग से आज लोक उत्सव का प्रारम्भ भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह में संस्कार भारती के संस्थापक कला ऋषी पद्मश्री बाबा योगेन्द्र, राजमाता आसमा सिंह, संतोष सिंह प्रवन्धक जीवीएम कान्वेंट स्कूल, पोनिक्स पब्लिक स्कूल के प्रवन्धक डॉ विनायक जयसवाल राज्य ललित कला अकादमी के सदस्य डा नवीन श्रीवास्तव एवं किशन स्वीट के अजय सिंह ने दीप प्रज्वलित कर अव माँ सरस्वती जी के प्रतिमा पर माल्यर्पण कर किया। मंच संचालन प्रेम पराया, ईना लखमानी, विनोद उपाध्याय तथा पं ज्वाला प्रसाद मेमोरियल के बच्चों ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया। वहीं कायस्थ सेवा ट्रस्ट, बस्ती विकास समिति, आर्ट ऑफ बस्ती, विश्व संवाद परिषद, हनुमान गढ़ी मंदिर समिति कटरा, संस्कार भारती, कैलाशी सेवा समिति, डिप्लोमा इंजीनीयर संघ, होमियोपैथिक एसोसिएशन, पं ज्वाला प्रसाद संगीत प्रशिक्षण संस्थान, विवेकानंद इंटर कॉलेज दुबौलिया, झिनकू लाल त्रिवेणी इंटर कॉलेज कलवारी, चित्रांश क्लब सहित लगभग दर्जनों संस्थाओं से अधिक ने सम्मानित किया वही इसके पूर्व राहुल श्रीवास्तव ने सपत्नी बाबाजी का चरण पखारा तथा प्रवेश द्वार से ही स्काउट बच्चों द्वारा बैंड के माध्यम से बाबा जी का स्वागत पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया।
पदमश्री बाबा योगेन्द्र जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि आप सभी अपनी साधना बढ़ाएं हम आप सभी को ऐसे कार्यक्रमों में आप सभी को आमंत्रित करता हूँ। हमारी विलुप्त हो रही संस्कृति को संवारने सजाने के कार्य करने के लिए आयोजक मण्डल बधाई के पात्र हैं। आप अपनी पहचान लोक संस्कृति के माध्यम से बनाए रखें। उत्सव के मुख्य आकर्षण कार्यक्रम रहे बुध दिव्यांग बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गोरखपुर से आए रविराज, शगुन श्रीवास्तव एवं संगीत अकादमी के सदस्य अमित अंजन के प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को झूमा दिया। वही दिल्ली स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, जीवीएम कान्वेंट स्कूल, यूनिक साइंस एकेडमी, फोनिक्स पब्लिक स्कूल सहित विभिन्न विद्यालयों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति से लोग थिरकने एवं गुनगुनाने लगे। कार्यक्रम में किन्नरों की प्रस्तुति एवं दहेज प्रथा पर प्रहार करते हुए विजय श्रीवास्तव द्वारा रचित नाटक नई रीति ने चार चांद लगा दिया। नाटक का निर्देशन भक्ति नारायण श्रीवास्तव ने किया जिसमें वंदना चौधरी लड़के लड़की की माँ की भूमिका में, सिम्मी भाटिया लड़की की भूमिका में, भक्तिनारायन सिपाही की भूमिका में, सूर्या उपाध्याय दरोगा की भूमिका में, सुख सागर मंजुल मामा की भूमिका में, राहिल खान बेटे की भूमिका में, शुभम साहू पड़ोसी की भूमिका में, परमात्मा श्रीवास्तव मुखर्जी की भूमिका में, लड़के के पिता की भूमिका में विजय श्रीवास्तव, दहेज की भूमिका में बाल मुकुंद ने किरदार निभाया।
उत्सव में संस्कार भारती गोरक्ष प्रान्त के महामंत्री डा आशीष श्रीवास्तव, हरिप्रसाद जी, आँचल सिंह,डा नवीन सिंह, डा वीरेन्द्र त्रिपाठी, अजय वर्मा, अनुपमा श्रीवास्तव, ई राजेश श्रीवास्तव, डा वेद प्रकाश श्रीवास्तव, हरेन्द्र सिंह, राजेश आर्य, संतोष श्रीवास्तव, डॉ रमा शर्मा, उषा पाण्डेय, निर्मला वर्मा, कमला वर्मा, कला मैम, मो हाशिम आजमी विक्की, मास्टर शिव, शुभम गुप्ता, उत्कर्ष श्रीवास्तव, कमलेश, अश्विनी सिंह, दुर्गेन्द्र श्रीवास्तव, दुर्गेश श्रीवास्तव,सर्वेश श्रीवास्तव,आलोक श्रीवास्तव,राजेश श्रीवास्तव,जीतेन्द्र श्रीवास्तव,राहुल श्रीवास्तव,अभिनव श्रीवास्तव, नीलम मिश्रा, भक्ति नारायण श्रीवास्तव, राज श्रीवास्तव, उत्कर्ष श्रीवास्तव, शुभम गुप्ता, राजेश चित्रगुप्त, राना दिनेश प्रताप सिंह, भावेश पाण्डेय, जी डी मिश्र, सत्येन्द्र श्रीवास्तव, आदर्श श्रीवास्तव, अश्वनी श्रीवास्तव, अनिल पाण्डेय, डा अजीत कुशवाहा धनुषधारी, अविनाश श्रीवास्तव चंचल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। वही बच्चों द्वारा बनाई गई रंगोली और बस्ती के धरोहर पर बनाया गया चित्रकला आकर्षण का केन्द्र रहा।

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