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5 करोड़ के लागत से बने सीएचसी सल्टौवा मे स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल

अस्पताल निर्माण के 8 साल बाद अभी तक पहुंच पाया पेरासीटामोल की टिकिया,अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, आंख की मशीन, प्लास्टर, खून व पेशाब की जांच जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विभाग का ताला
क्षेत्रीय जरूरतमंद लोगों को नही मिल पा रहा है स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ,सरकार के जीरो टेलरेंस नीति पर खौलता पानी डाल रहे हैं विभाग के जिम्मेदार

संवाददाता विश्वपति वर्मा (सौरभ)

बस्ती – देश के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए सरकार द्वारा नाना प्रकार की योजना बनाई जाती है लेकिन कार्यों में उदासीनता और धांधली के चलते योजना अपने उद्देश्य तक जाने से पहले ही दम तोड़ देती है।इस प्रकार का एक मामला जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर सल्टौआ ब्लॉक के अमरौली शुमाली ग्राम पंचायत में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है जिसका नींव 2012-13 में पड़ा था लेकिन आठ साल बीतने के बाद इतने बड़े अस्पताल में महज पेरासिटामोल की व्यवस्था हो पाई है यानी कि मामूली दवाओं के अलावा अस्पताल में मेडिकल संसाधनों के नाम पर कुछ नही है।अस्पताल निर्माण में हुआ तीन साल की देरी -जनता की असुविधा को देखते हुए समाजवादी सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री राज किशोर सिंह द्वारा इसका शिलान्यास वित्तीय वर्ष 2012-13 में किया गया था जिसका निर्माण प्रारंभ होकर मार्च 2017 में कार्य पूरा होना था इसके लिए कार्यदायी संस्था निर्माण इकाई और आवास एवं विकास परिषद को सितंबर 2016 में ही संपूर्ण धनराशि का भुगतान कर दिया गया था लेकिन तय अवधि बीत जाने के 30 महीने बाद तक भी अस्पताल का कार्य पूरा नही हो सका जिसका परिणाम रहा कि अस्पताल को अप्रैल 2020 में जनता को समर्पित किया गया।


अस्पताल के उद्घाटन के बाद वहां पर कौन -कौन सी व्यवस्था शुरू हुई है इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए हमारे संवाददाता ने मौके पर जाकर वहां की
स्थिति का जायजा लिया तो पता चला कि 8 साल बाद भी स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में एक्सरे ,अल्ट्रासाउंड ,आंख की मशीन ,प्लास्टर , खून और पेशाब
की जांच , जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच भी सुनिश्चित नही करा पाया। 30 बेड का बना है अस्पताल-लाखों आबादी को ध्यान में रखते हुए यहां सामुदायिक भवन का निर्माण करवाया गया है जिसमे एक साथ 30 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा सकता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता इस कदर है कि अभी अस्पताल आवश्यक संसाधनों की पूर्ति नही कर पाया है। जबकि अमरौली शुमाली ,सेखुई ,तेलियाडीह ,औड़जंगल, द्वारिका चक,रामपुर मुड़री ,शिवा ,बस्थनवा, गोरखर,चैकवा ,बंजरिया समेत कई दर्जन गांवों के लोगों को अस्पताल से काफी उम्मीद है।
एक्सरे , अल्ट्रासाउंड और इमरजेंसी कक्ष में ताला -क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता के लिए लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता था लेकिन जब से अस्पताल बनने का कार्य शुरू था तबसे लोगों के अंदर उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें इस काम के लिए मीलों दूर नही जाना पड़ेगा परंतु जिम्मेदार जनों की उदासीनता इस कदर हावी है कि अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नही हो पाई वहीं अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी स्वास्थ्य संसाधनों की पूर्ति नही हो पाई है इस लिए आज भी इन कमरों में ताला लगा हुआ है।प्रसव कार्य शुरू -अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए जांच आदि की कोई व्यवस्था अभी तक उपलब्ध नही हो पाया है लेकिन यहां पर प्रसव कार्य शुरू हो गया है इसके लिए 3 महिला कर्मचारियों की तैनाती की गई है और एक एम्बुलेंस की व्यवस्था भी कराई गई है।
डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी-
अस्पताल को चलाने के लिए सबसे पहले उससे संबंधित डाक्टर और कर्मचारियों की आवश्यकता पूरी की जानी चाहिए लेकिन 30 बेड के बने इस अस्पताल में अभी तक मात्र 1 लैब टेक्नीशियन की तैनाती की गई है ,अस्पताल में कार्य करने वाले छः और स्टाफ हैं जिनमे दो डॉक्टर , दो फार्मासिस्ट और दो स्वीपर हैं लेकिन इन्हें बगल में ही बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से हटा कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात कर दिया गया । इसके अलावा जनवरी 2021 में अस्पताल में 4 और डॉक्टरों को जनपद के ही अस्पतालों से हटाकर तैनात किया गया है लेकिन अभी तक तक अस्पताल में किसी भी डॉक्टर ने ज्वाइन
नही किया है।

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