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होम आइसोलेशन में हो सकेगा कोरोना ग्रसित बच्चों का इलाज

– कोविड-19 का बच्चों पर असर को रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन
– सतर्कता के साथ बच्चों को घर पर ही कोरोना मुक्त रख सकते हैं
– गंभीर स्थिति मे ही अस्पताल जाने की जरूरत होगी
– रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन, व इस्टीरायड बच्चों को देने पर रोक लगाई, सिर्फ गंभीर बच्चों को देने की अनुमति
बस्ती। कोविड-19 का असर बच्चों पर होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ने गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक सिर्फ कोरोना से ग्रसित गंभीर बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होगी। बाकी का इलाज होम आइसोलेशन में रखकर किया जा सकता है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एफ हुसैन का कहना है कि तीसरी लहर में बच्चों के लिए ज्यादा खतरे को देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं। केंद्र सरकार की गाइड लाइन का पालन कराने के लिए चिकित्सकों से कहा गया है।
गाइडलाइन के मुताबिक जिन बच्चों का आक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। गाइडलाइन में बच्चों को इस्टीरायड देने की सख्ती से मनाही की गई है। सिर्फ गंभीर बच्चों को विशेष परिस्थितियों में पर यह दवा देने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन, फैवीपिराविर जैसी दवाओं को बच्चों को देने से मना किया गया है।
आक्सीजन 90 से कम होने पर किया जाएगा भर्ती
गाइडलाइन में कहा गया है कि जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम आता है उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टी आर्गन डिस्फक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीज को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। इन बच्चों को इस्टीरायड दिए जा सकते हैं।
गाइडलाइन के अनुसार कुछ बच्चे में बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या हो सकती है, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना चाहिए। उनका स्टूल टेस्ट कराने पर पुष्ट हो जाएगा कि उन्हें कोरोना है या नहीं।

लक्षण विहीन के इलाज में रखनी होगी सावधानी
दिशानिर्देश में यह भी कहा गया है कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमटोरी सिन्ड्रोम भी हो सकता है जिसके लिए सतर्क रहने की जरूरत हैद्य। गाइनलाइन में साफ कहा गया है कि सिर्फ कोरोना ग्रसित गंभीर बच्चों को भर्ती कराने की जरूरत होगी। बाकी का इलाज घर में रहकर ही किया जा सकता है। बस उनकी नियमित मानिटरिंग होनी चाहिए। ज्यादातर बच्चे लक्षणविहीन हो सकते हैं इसलिए उनका इलाज सावधानी से करने की जरूरत है।
क्या हो सकते है लक्षण-
– ज्यादातर बच्चे लक्षणविहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले मरीज होंगे। बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंधने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण होंगे, दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द होना।

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