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कोरोना को मात् देकर डिस्चार्ज हुये 98 वर्षीय वंशीलाल राजपाल

वंशीलाल को रिसीव करने आये परिजनों का नही रहा खुशी का ठिकाना

बस्ती। 98 साल के वंशीलाल राजपाल जब कोरोना को हराकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुये तो उन्हे लेने पहुंचे परिजनों की खुशी का ठिकाना नही रहा। अस्पताल के प्रबंधन और कोविड मरीजों के उपचार से जुड़े स्टाफ भी इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। दरअसल बस्ती शहर के खीरीघाट मोहल्ले के रहने वाले व्यापारी नेता आनंद राजपाल के पिता वंशीलाल राजपाल 14 मई को कोरोना संक्रमित हो गये।
रिपोर्ट आने के बाद परिजनों ने पहले घर पर ही उनकी देखरेख शुरू की। आक्सीजन लेवल में काफी उतार चढ़ा देखकर उन्हे 19 मई को ओपेक चिकित्सालय कैली में भर्ती कराया गयां। यहां 12 दिन तक उनका इलाज हुआ। रविवार को रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद सोमवार को उन्हे अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। कोविड पाजिटिव होने के बाद जहां 40-50 साल के लोग या यूं कहें कि कई बार युवा भी हिम्मत हार जा रहे हैं और उन्हे बचाया नही जा सका। ऐसे में 98 साल के वंशीलाल की हिम्मत दूसरे कोविड मरीजों के लिये प्रेरणा देने वाली है।
इतना ही नही वंशीलाल राजपाल जब संक्रमित हुये तो उनके घर का माहौल भी सकारात्मक था, उनकी पत्नी बेअंत कौर का 13 मई को निधन हुआ था, उन्होने ही मुखाग्नि दिया था। सारा माहौल नकारात्मक और शोकग्रस्त था। बावजूद इसके उन्होने हिम्मत नही हारा, और नतीजा ये रहा उनसे कोरोना हार गया। वंशीलाल के उपचार के विषय में ओपेक चिकित्सालय में कोविड वार्ड का मैनेजमेंट संभाल रहे जाने माने सर्जन जीएम शुक्ला से बात की गयी। उन्होने जो कहा वह दूसरे कोविड मरीजों के लिये अत्यन्त उपयोगी हो सकता है।
आप भी जानिये जीएम शुक्ला ने क्या कहा
डा. जीएम शुक्ला ने कहा वंशीलाल राजपाल जी जब एडमिट किये गये थे, उस वक्त उनका आक्सीजन लेवल नीचे ऊपर हो रहा था। उन्हे आक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। 12 दिनों के इलाज में एक दो बार उनका आत्मबल कमजोर हो रहा था। लेकिन बातचीत के जरिेय इसे बूस्ट किया गया। सबसे खास बात ये रही है कि 98 की उम्र में भी वंशीलाल जी काफी फिट हैं। इलाज के दौरान वे खुद सांसों से जुड़े योगाभ्यास किया करते थे। एक बार जो बतया गया पूरे अनुशासन में रहकर उन्होने उसका ध्यान रखा। साथ ही वे पहले से भी नियमित योगा करते रहे। अस्पताल के प्रबंधन, मेडिकल स्टाफ की देखरेख से ज्यादा इक्सरसाइज ने उन्हे सपोर्ट किया। उन्होने कोविड मरीजों को संदेश देते हुये कहा कि वे खानपान दपर विशेष ध्यान रखे और नियमित योगाभ्यास करें।

डा. रोहित शाही की सुनिये

डा. शाही से वंशीलाल जी के बारे में बात की गई तो उन्होने कहा कोविड मरीजों के लिये उनकी हिम्मत सबसे बड़ा इम्यूनिटी बूस्टर है। हिम्मत कमजोर होने पर कोई इम्यूनिटी बूस्टर काम नही करता और मरीज जिंदगी की जंग हार जाता है। जहां तक वंशलाल जी की बात है तो उनकी दिनचर्या बड़ी नियमित है। रोज समय पर उठना, सो जाना, योगा करना, खान पान का ध्यान रखना, सकारात्मक सोचना और परिस्थितियों का हिम्मत के साथ सामना करना उनकी आदतों में शुमार है। इन सबके साथ कोविड पाजिटिव होते हुये भी परिजनों ने उनकी बड़ी सेवा की। नका हर समय ध्यान रखा। 12 दिनों के इलाज के दौरान वे एक घण्टा भी अकेले नही रहे। आजकल पाजिटिव रिपोर्ट आने के बाद जहां लोग ूदरियां बना लेते है एैसे परिजनों की समुचित देखरेख भी वंशीलाल जी की रिकवरी में सहयोगी रहा।

परिजनों ने दिया धन्यवाद

अस्पताल के प्रबंधन और कोविड मरीजों के उपचार से जुड़े सभी चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ को वंशीलाल राजपाल के परजिनों ने धन्यवाद दिया है। नियमित देखभाल के बाद महेश राजपाल, रजित राजपाल, गौरव राजपाल, सौरभ राजपाल और पोती हिमांशी राजपाल उन्हे लेने ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंचे थे। कोरोना को हराने के बाद सभी उत्साहित थे।

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