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एस.एस. मेडिकल सेंटर स्टाफ की लापरवाही से हुई नवजात शिशु की मौत

मरीजों के लिए यमराज साबित हो रहा है एस.एस. मेडिकल सेंटर

एक महिला का गलत आपरेशन कर निकाल दिया यूट्रस

डीएम के आदेश पर शुरू हुआ जांच, ए.डी. हेल्थ सी0पी0 कश्यप ने कार्यवाही हेतु सीएमओ को लिखा पत्र

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती। उ0प्र0।

बस्ती। जिले में बहुत से ऐसे नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, जहां न तो प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही मेडिकल स्टाफ। जिसके चलते अक्सर नए-नए मामले उजागर होते रहते हैं।
ऐसा ही एक मामला मंगलवार को प्रकाश में आया। शहर के कटेश्वर पार्क में संचालित हो रहे एस.एस. मेडिकल सेंटर का है जहां मेडिकल स्टाफ की लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की मौत हो गई। जिसके बाद अस्पताल कर्मी सकते मे आ गये और बच्चे के परिजनों को उसके मौत का कारण भी न बता सके। पीडित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जबकि स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंद कर रेवडी की तरह मौत का लाइसेन्स बांट रहा है। एस.एस. मेडिकल सेंटर मे ऐसे दो मामले प्रकाश मे आये। जिसमें एक महिला का गलत आपरेशन कर उसके परिजन से बडे मात्रा मे अवैध धन उगाही की गयी। दूसरी घटना मेडिकल स्टाफ की घोर लापरवाही के चलते मासूम की मौत हो गयी। इन दोनों घटनाओं को लेकर यह हास्पिटल सुर्खियों मे आ गया है।
पहली घटना-
जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के छनवतिया गांव निवासी सोनू त्रिपाठी अपनी पत्नी प्रीती त्रिपाठी को यूरिन इन्फेक्शन की समस्या को लेकर 26 अप्रैल 2021 को शहर के कटेश्वर पार्क में संचालित हो रहे एस.एस. मेडिकल सेंटर पहुंचे। वहां कथित चिकित्सकों ने बताया कि मूत्र मार्ग मे गांठ है जिसके वजह से यह समस्या है। जो आपरेशन के बाद ठीक होगा। सोनू त्रिपाठी ने उच्चाधिकारियों को प्रेषित शिकायती प्रार्थना पत्र मे कहा कि यहां जांच के नाम पर पहले 5 हजार रूपये लिए गये। फिर आपरेशन के लिए 18500 रूपया लिया गया। इतना ही नही मरीज के लिए खून की कमी बताकर दो यूनिट खून का मांग किया गया। जिसे परिजनों द्वारा उपलब्ध कराया गया। पीडित सोनू ने बताया कि आपरेशन के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन मरीज की समस्या यथावत रही। जब पीडित ने दूसरे चिकित्सक को दिखया गया तो स्पष्ट हुआ कि आपरेशन गांठ का नही बल्कि मरीज का यूटेªस ही निकाल दिया गया। जिसे सुनकर पीडित हतप्रभ रहा गया। सोनू ने बताया कि गांठ की वजह से यूटेªस मे इन्फेक्शन था। गांठ के बजाय यूटेªस ही निकाल दिया गया। सोनू त्रिपाठी ने जिलाधिकारी को पत्र देकर एस.एस. मेडिकल सेंटर के प्रबन्धक, चिकित्सक तथा मेडिकल स्टाफ के विरूद्व जांच कर कडी कार्यवाई करने की मांग की है। इस मामले मे जिलाधिकारी के आदेश पर जांच बैठ गयी है।
दूसरी घटना-
जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के साहूपार गांव निवासी आनन्द कुमार की पत्नी नीलम गौड प्रसव पीडा मे थी। जिसे लेकर आनन्द कुमार 19 जुलाई की आधी रात मे पत्नी को लेकर जिला महिला चिकित्सालय बस्ती पहुंचे। इस अस्पताल मे मेडिकल स्टाफ ने बताया कि बच्चा पेट मे उल्टा है मरीज को आप कैली या कहीं प्राईवेट अस्पताल मे ले जाईए। यहां ऐसी कोई व्यवस्था उपलब्ध नही है। जैसे ही आनन्द कुमार बाहर निकले उन्हें सूसीपार की आशा उर्मिला देवी मिल गयी। आशा ने समझा-बुझाकर महिला को लाकर एस.एस. मेडिकल सेंटर मे भर्ती करा दिया। यहां 12 हजार रूपये मे सुरक्षित नार्मल डिलीवरी करने का दावा किया गया। उस समय तक जच्चा व बच्चा सुरक्षित थे। पीडित आनन्द कुमार ने बताया कि कुछ ही देर मे नार्मल डिलीवरी से बच्चा पैदा हुआ लेकिन उसकी रहस्यमय परिस्थितियों मे मौत हो गयी। अस्पताल प्रबन्धन कोई जबाब भी नही दे रहा है कि बच्चे की मौत क्यों और कैसे हुई ?
बहरहाल इन दोनों घटनाओं ने आम जनमानस को झोकझोर कर रख दिया है। सूचना पर हास्पिटल पर पहुंची कबीर बस्ती न्यूज की टीम ने घटना के तह तक पहुंचने का प्रयास किया। हास्पिटल के कर्मियों ने परस्पर विरोधाभासी बयान दिये। लोगों से पूछने पर पता चला कि यहां रात्रि के समय कोई डाक्टर मौजूद नही रहते। दाईयों के भरोसे अस्पताल चल रहा है। जिससे ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं।
विभागीय सूत्रों ने तो यहां तक बताया कि अस्पताल खोलना बहुत आसान है लाइसेन्स के लिए डाक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ का कागजात् लगाया जाता है। लेेकिन अस्पताल मे रजिस्टर्ड चिकित्सक व पैरा मेडिकल वास्तविक रूप से मौजूद नही रहते। अस्पताल अप्रशिक्षित दूसरे लोगों के देख रेख मे संचालित होता है।
इस सम्बन्ध मे एडी हेल्थ डा0 सी0पी0 कश्यप ने पूछने पर बताया कि प्रकरण आपके द्वारा मेरे संज्ञान मे लाया गया है। प्रकरण काफी गंभीर है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ बस्ती को जांच कराकर कडी कार्यवाही करने हेतु सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं।

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