सीआरओ के जांच के बाद सीएम के दरबार मे पहुंचा डीआरएमएस हास्पिटल का मामला

– एक ही अस्पताल को दो बार पंजीकरण कर फंसे सीएमओ, गाज गिरना तय
– जांच के दौरान ही विरोधाभासी प्रमाण पत्रों पर बिना सत्यान के दे दिया था लाइसेन्स
– छापेमारी मे प्रतिबन्धित मशीनें मिलने के बाद भी नोडल अधिकारी डा0 सी.एल.कन्नौजिया ने नही किया कोई कार्यवाही और दे दिया क्लीन चिट

कबीर बस्ती न्यूजः

बस्ती। जिला प्रशासन के नंेतृत्व मे हुए डीआरएमएस हास्पिटल बैरियहवा के जांच मे लीपापोती के बाद मामला अब मुख्यमंत्री के दरबार मे पहुंच गया है। एडी हल्थ के बाद डीएम प्रियंका निरंजन के निर्देश पर मुख्य राजस्व अधिकारी नीता यादव द्वारा जांच के दौरान किये गये अनगिनत गैर कानूनी कार्यों का कच्चा चिट्ठा शिकायत कर्ता सिकटा निवासी चित्रसेन पाण्डेय ने सीएम दरबार मे खोल दिया है। जिसे देख शासन स्तर के अधिकारी भी हैरान हैं। इस प्रकरण मे जांचकर्ता अधिकारियों तथा स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा0 सी.एल.कन्नौजिया पर शासन स्तर से चाबुक चलने की संभावना प्रबल हो गयी है।
बताते चलें कि थाना वाल्टरगंज के सिकटा गांव निवासी चित्रसेन पाण्डेय ने डीआरएमएस हास्पिटल बैरियहवा व उसके चिकित्सक डा0 प्रमोद कुमार के विरूद्व गंभीर शिकायतों को मण्डलायुक्त के समक्ष रखा था। जिसे गंभीरता से लेते हुए मण्डलायुक्त ने एडी हेल्थ बस्ती मण्डल को जांच टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। इस जांच मे एडी हेल्थ ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। जांच हुई लेकिन आरोपी चिकित्सक को बचाने के लिए जांच अधिकारियों ने प्रकरण को केवल जबाब-सवाल तक ही सीमित रखा। कुल मिलाकर मामले की लीपापोती कर दिया गया।
शिकायतकर्ता चित्रसेन पाण्डेय ने बताया कि एडी हेल्थ के जांच व लीपापोती से असंतुष्ट होकर गत दिनों शपथ पत्र के साथ डीआरएमएस हास्पिटल बैरियहवा व चिकित्सक डा0 प्रमोद कुमार के विरूद्व शिकायत किया थां। जिसकी जांच मुख्य राजस्च अधिकारी नीता यादव द्वारा किया गया। श्री पाण्डेय ने बताया कि सीआरओ की जांच मे दोनों पक्षों का बयान तथा साक्ष्य भी लिया गया था। जिसके उपरान्त डीआरएमएस हास्पिटल बैरियहवा पर तहसीलदार व स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा0 सी.एल.कन्नौजिया द्वारा छापेमारी किया गया। जहां दो प्रतिबन्धित मशीनें बिना किसी वैध विषय विशेषज्ञ के संचालित होना पाया गया इसके साथ ही अनकों गंभीर खामियां पाये जाने के बाद उपरोक्त अस्पताल को सील कर दिया गया। यहां बताना आवश्यक होगा कि जांच के दौरान उक्त हास्पिटल का विरोधाभासी प्रमाण पत्रों के आधार पर सीएमओ द्वारा पंजीकरण कर दिया गया। अभी यह प्रकरण चल ही रहा था कि उस अस्पताल पर छापेमारी के बाद स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा0 सी.एल.कन्नौजिया ने डीआरएमएस हास्पिटल बैरियहवा दूसरा पंजीकरण कर दिया। श्री पाण्डेय ने बताया कि नोडल अधिकारी डा0 सी.एल.कन्नौजिया द्वारा न तो प्रतिबन्धित मशीनों का सील किया गया और न ही आरोपी चिकित्सक के विरूद्व कोई कार्यवाही ही की गयी और मामले मे लीपापोती करते हुए अस्पताल संचालक चिकित्सक को चेतावनी देते हुए सील किये गये अस्पताल का ताला खोल दिया गया। श्री पाण्डेय ने जांच अधिकारियों द्वारा नियम विरूद्व किये गये कार्यवाहियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी अस्पताल का दो बार पंजीकरण नही हो सकता। जिम्मेदारों का यह कदम नियम विरूद्व है। उनका आरोप है कि उक्त अस्पताल व आरोपी डाक्टर को बचाने के लिए उपरोक्त अधिकारियों ने पूरी ताकत लगा कर अपना गर्दन ही फंसा लिया है।
श्री पाण्डेय ने बताया कि आरोपी चिकित्सक एस सामान्य एमबीबीएस हैं जबकि वह जबरदस्ती न्यूरो का डाक्टर लिखते है। जांच के दौरान यह कथन भी अवैध पाया गया जो धोखाधडी के श्रेणी मे आता है। लेकिन अधिकारियों द्वारा इस पर भी कोई कार्यवाही नही किया गया। उन्होंने बताया कि प्रकरण को मुख्यमंत्री एवं डिप्टी सीएम बृजेश पाठक एवं महानिदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया है। जिसमें शासन स्तर से बडी कार्यवाही होने की उम्मीद है।

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