कोहबर कार्यशाला एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का उदघाटन

कबीर बस्ती न्यूज।

बस्ती । राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग एवं बस्ती विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में टाउन क्लब में 18 फरवरी से चल रहे परंपरा कोहबर कार्यशाला एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का उदघाटन आज समिति संरक्षक वरिष्ठ समाजसेवी डा वीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंच संचालन कोषाध्यक्ष सरिता शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के पूरे समय प्रतिमा सिंह, शिवा त्रिपाठी, शुभम गुप्ता  एवं अन्य महिलाओं द्वारा पारम्परिक लोक गीत चलता रहा।
डा वीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मेरा मानना है कि जब से विवाह संस्कार प्रारंभ हुआ होगा तभी से कोहबर परंपरा चली आ रही है। गांव की जिन महिलाओं ने विद्यालय का कभी मुँह नही देखा होगा उन्होंने एक छोटे से कोहबर में अपने उस अंचल की हर बात को चित्रों के माध्यम से कहने का कार्य करती रही है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि लोक समाज में जड़े जब स्थायित्व प्राप्त कर लेती हैं तब वे लोकमान्यताओं में परिवर्तित होकर हमारी पारम्परिक संस्कृति बन जाती है। लोककला देश की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा व मर्यादा होती हैं। लोक चित्रकला पूरे राष्ट्र में अलग अलग है पर मूल भाव एक है और इसी से राष्ट्र की पहचान होती है।
समिति अध्यक्षा डॉ शैलजा सतीश ने कहा कि कोहबर में दूल्हे का उन अज्ञात शक्तियों से परिचय कराया जाता है जो अदृश्य है जैसे कुलदेवता, ग्रामदेवता,  स्थानदेवता, नागदेवता, वास्तुदेवता।
का सु साकेत महाविद्यालय की प्रवक्ता डॉ कुमुद सिंह ने कहा कि कोहबर लोक विश्वास और परंपराओं के आधार पर चलती है । कोहवर चित्रकला के माध्यम से नवदम्पति को आशीर्वाद का प्रावधान है।
डॉ रमा शर्मा ने कहा कि कोहबर सहज उपलब्ध होने वाली सामग्री के माध्यम से अंकित किया जाता है। गोबर, मिट्टी, खड़िया, गेरू, हल्दी, रामरज इत्यादि माध्यम से बनाया जता है। इसमे वर्गाकार आकृति के अंदर शुभ आकृतियां जैसे कलश, स्वास्त्विक, गंगा यमुना, सूर्य चंद्रमा, देव स्वरूप शिव पार्वती का अंकन अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। इसके अतिरिक्त बांस का पेड़ विषैले जीवजंतु बनाने का उद्देश्य नव दंपत्ति को यह समझाना है कि सुख के साथ जीवन में दुख भी जरूर आएंगे तो प्रकृति के साथ तादात्म्य बनाये रखते हुए जीवन को सफल बनाये।
गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या, देवरिया जनपद से राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की प्रवक्ता सरिता सिंह सहित प्रतिभाग की कुल 25 महिलाओं ने बोरा, गोबर, खड़िया मिट्टी के बने कैनवास पर रंग, गेरू, गोबर, हल्दी के माध्यम से कोहबर कलाकृतियों को उकेरा है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से समिति संस्थापक अध्यक्ष राहुल श्रीवास्तव, राज्य ललित कला अकादमी के प्रतिनिधि वरिष्ठ लिपिक ओम प्रकाश श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी विकास नारायण, राना दिनेश प्रताप सिंह, मयंक श्रीवास्तव, प्रशांत पाण्डेय, राजेश मिश्र, शुभम गुप्ता, उत्कर्ष श्रीवास्तव, प्रतिभा श्रीवास्तव, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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