विभागीय संरक्षण मे उधोग का रूप ले चुके हैं सैकडों नाजायज अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर
– नाजायज अस्पतालों व मुन्ना भाईयों पर कार्यवाही करने मे फिसडडी साबित हो रहा है स्वास्थ्य विभाग
– बिना डिग्री व पंजीकरण के पांच अलग-अलग जनपदों मे नाक कान गला रोग का इलाज करता है कथित वैध आर.डी. चौधरी
– रजिस्ट्रेशन पॉली क्लीनिक का लेकिन संचालित हो रहा है पूरा अस्पताल व अल्ट्रासाउंड सेन्टर
– कथित वैध आर.डी. चौधरी के धमकाने से नोडल अधिकारी के छूटते हैं पसीने, कार्यवाही करने की नही होती हिम्मत
– चिकित्सक विहीन अस्पताल, निरीह मरीजों के जान पर संकट
– सल्टौवा सीएचसी अन्तर्गत सेखुई भिरिया बाजार मे संचालित लक्ष्मी हास्पिटल का मामला
– सूचना के एक माह बाद भी कार्यवाही करने मे नाकाम रहा स्वास्थ्य महकमा
रिर्पोट- शाहीन कुरैशी
कबीर बस्ती न्यूज
बस्ती। जिले मे मुन्ना भाईयों द्वारा किये जा रहे नाजायज अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड सेन्टरों तथा झोलाछाप द्वारा क्लीनिक के संचालन के सूचना प्राप्त होने के एक माह बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ऐसे अस्पतालों के विरूद्व कार्यवाही करने मे नाकाम रहे। इसके पीछे कारण क्या है यह समझने वाले समझ रहे होंगे। जनपद के विभिन्न अस्पतालों मे लगातार हो रही मरीजों बच्चों के मौतों से आम लोगों की आत्मा भले ही झकझोर उठी हो लेकिन स्वास्थ्य विभाग के के असवेंदनशीलता पर कोई प्रभाव नही पडा।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या उदासीनता अथवा मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध यह स्थिति निरीह मरीजों के जीवन पर संकट बन कर खडा है। जिले मे नाजायज तरीके से संचालित हो रहे ऐसे अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेन्टरों की संख्या मे विभागीय कृपा दृष्टि से भारी इजाफा हुआ है। अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेन्टर जिले कोने. कोने मे गाजर मूली की दुकानों की भांति खुलेआम संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग जानबूझ कर अन्धा और बहरा हो चुका है वह न तो देखता है और न ही सुनता है। जाहिर है ऐसे लोग गैर कानूनी कार्य का अपना परचम तो लहराते रहेंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं सल्टौवा सीएचसी अन्तर्गत सेखुई भिरिया बाजार मे विगत दो वर्षों से संचालित लक्ष्मी हास्पिटल तथा नाक कान और गला रोग का झोलाछाप वैध आर.डी. चौधरी का। लक्ष्मी हास्पिटल का रजिस्ट्रेशन पॉली क्लीनिक का है लेकिन महिला रोगों से लेकर यहां गंभीर से गंभीर रोगों के इलाज का दावा किया जाता है। यहां बिना पीसीपीएनडीटी के अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है। इसका खुलाशा तब हुआ जब प्रेस की टीम ने इस अस्पताल का स्टिंग आपरेशन किया और महिला रिर्पोटर का नगद 600 रूपये जमा कर अल्ट्रासाउंड भी कराया।जिसका पूरा वीडियो कैमरे मे कैद हो गया।
हैरानी की बात तो यह थी कि इस कथित अस्पताल मे न तो कोई वैध चिकित्सक ही मौजूद है और न ही कोई अनुभवी पैमेडिकल। फिर यहां डिलीवरी ए भ्रूणहत्या से लेकर अनेंकों गंभीर रोगों का इलाज करने का दावा किया जा रहा है।
प्रेस की टीम प्रातः करीब 11ण्30 बजे लक्ष्मी हास्पिटल सेखुई भिरिया बाजार पर पहुंची जहां महिला रिर्पाोटर को पेट का दर्द बताकर हास्पिटल मे उपस्थित डाक्टर का भेष बनाकर कर बैठे बृजेश भट्ट के एडवाइज पर अल्ट्रासाउंड कराया गया और रिर्पोट कब्जे मे लिया गया कथित चिकित्सक ने आधा दर्जन से अधिक दवाएं भी लिखे। लेकिन दवा वहां पर खरीदा नही गया। इस प्रकार से क्षेत्रीय जनता के साथ धोखाधडी करते हुए अस्पताल प्रबन्धन द्वारा मरीजों के जान से खिलवाड किया जा रहा है। ऐसे नीम हकीम नान मेडिकल के हवा हवाई इलाज से न जाने कितने मरीज इस दुनिया से कूच कर गये होंगे और न जाने जाने कितने लोग गलत इलाज के चलते अपने अज्ञानता तथा अस्पताल प्रबन्धन के द्वारा किये गये इलाज पर आंसू बहा रहे होंगे। अस्पताल प्रबन्धन चन्द रूपयों के लालच मे इन्सान से हैवान बन चुका है। अवैध धन उगाही के लिए अन्जान निरीह मरीजों मरीजों का जान भी लेने पर आमादा है। जिसका कोई नियंत्रण स्वास्थ्य महकमा नही कर पा रहा है।
नाम न छापने के शर्त पर क्षेत्र के दर्जनों लोगों ने प्रेस को बताया कि इस अस्पताल मे न तो कोई डाक्टर है और न ही कोई पैरामेडिकल मगर यहां सभी महिला सम्बन्धी नाजायज और प्रतिबन्धित कार्य धडल्ले से किये जाते हैं और जब किसी मरीज की हालत बिगडती है तो मरीजों के परिजनों को बस्ती ले जाने का दबाव देते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस अस्पताल मे अनेकों मरीजों के साथ गलत इलाज हुआ है। पीडित मरीजों ने आवाज भी उठाया है लेकिन पहुंच के बल पर मरीजों का आवाज दबा दिया गया है।
सल्टौवा के जिनवां तथा पांच जिलों मे क्लीनिक चलाने वाले कथित वैध आरडी चौधरी जिनके क्लीनिक पर मरीजों का तांता लगा रहता है। कथित वैध आरडी चौधरी के पास न तो कोई डिग्री है और न ही क्लीनिक का पंजीकरण। उसकी हनक इतनी जबरदसत है कि उसके हडकाने पर नोडल अधिकारी को पसीने छूटने लगते हैं। कार्यवाही करने की बात तो दूर है। नोडल अधिकारी द्वारा प्रेषित किये गये नोटिस का भी कोई प्रभाव झोलाछाप पर नही डाल सका। नोडल अधिकारी द्वारा प्रेषित किये गये नोटिस को मुन्नाभाई ने डस्टबिन का रास्ता दिखा दिया।
