20 सूत्रीय मांगों को लेकर गरजे शिक्षक, दिया आन्दोलन की चेतावनी

मांगे न मानी गई तो करेंगे भाजपा का विरोध

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

सोमवार को पुरानी पेंशन नीति बहाली के साथ ही 20 सूत्रीय मांगो को लेकर  शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों और रसोईयों ने जिला बेसिक अधिकारी कार्यालय पर अपनी ताकत का अहसास कराया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक षिक्षक संघ जिलाध्यक्ष उदयशंकर शुक्ल ने चेतावनी के लहजे में कहा कि केन्द्र और प्रदेश सरकार के जिम्मेदार देख लें कि यदि मांगे न मानी गई तो और उग्र आन्दोलन राष्ट्रीय नेतृत्व के आवाहन पर किया जायेगा। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया।
हजारों की संख्या में धरने में उपस्थित शिक्षकों एवं अधिकारियों, कर्मचारियांे को सम्बोधित करते हुये उदयशंकर शुक्ल ने कहा कि पुरानी पेंशन नीति की बहाली, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों को नियमावली बनाकर शिक्षक बनाये जाने, रसोईया, आंगनवाड़ी एवं अन्य संविदा कर्मियों को नियमित कर न्यूनतम 21 हजार रूपये प्रति माह वेतन के रूप में भुगतान किया जाय। अन्यथा की स्थिति में चरणबद्ध ढंग से संघर्ष जारी रहेगा। धरने में एक स्वर से चेतावनी दी गई कि यदि मांगे न मानी गई तो आने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी का मुखर विरोध जारी किया जायेगा।
बीएसए कार्यालय पर आयोजित धरने को मुख्य रूप से अखिलेश मिश्र, राघवेन्द्र प्रताप सिंह,शैल शुक्ल,  विजय प्रकाश चौधरी,  राजकुमार सिंह, अभय सिंह यादव, इन्द्रसेन मिश्र, सतीश शंकर शुक्ल, रामभरत वर्मा, आनन्द दूबे, दिवाकर सिंह, फैजान अहमद, आनन्द प्रताप सिंह, त्रिलोकीनाथ, सन्तोष शुक्ल, नरेन्द्र पाण्डेय, देवेन्द्र वर्मा, रजनीश मिश्र, विनोद यादव, चन्द्रभान चौरसिया, सरिता पाण्डेय, रीता शुक्ला, रजनीश मिश्र, विवेककान्त पाण्डेय, रबीश मिश्रा, वृजभान यादव, राम पराग चौधरी, मनीष, राघवेन्द्र उपाध्याय आदि ने सम्बोधित करते हुये विन्दुवार मुद्दे उठाये। संचालन बब्बन पाण्डेय ने किया।
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजे 20 सूत्रीय ज्ञापन में पुरानी पेेंशन नीति बहाली, निजीकरण एवं आउट सोर्सिंग पर रोक लगाने, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों को नियमावली बनाकर शिक्षक बनाने, रसोईया, आंगनवाड़ी, आशा एवं अन्य संविदा कर्मियों को नियमित कर 21 हजार वेतन दिये जाने , संविलियन के नाम पर लगभग एक लाख प्रधानाध्यापकों के समाप्त किये गये पदों को बहाल करने, शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से शिक्षक विरोधी प्राविधान हटाये जाने, ब्लाक से लेकर शासन स्तर तक संगठन के पदाधिकारियों के साथ जिम्मेदार उच्चाधिकारियों की बैठक कराकर समस्या का निस्तारण कराने, 17140 एवं 18150 पदोन्नित तिथि से भुगतान किये जाने, खण्ड शिक्षाधिकारियों की 22 वर्षो से लम्बित पदोन्नित हेतु डी.पी.सी. किये जाने, आदि की मांग की शामिल है।
धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से मुक्तिनाथ वर्मा, ओम प्रकाश पाण्डेय, हरिकृष्ण उपाध्याय, विमल आनन्द, रामरेखा चौधरी, चन्द्रशेखर पाण्डेय, कैलाशनाथ, अवनीश तिवारी, ओम प्रकाश, शमशुल, पप्पू सक्सेना,  सन्तोष भट्ट, जयशंकर पाण्डेय, मारूफ खान, रामसजन यादव, रविन्द्र वर्मा,  सुनील पाण्डेय, पंकज गुप्ता, प्रदीप यादव, शिव प्रकाश पाण्डेय, विनय कुमार, रमेश विश्वकर्मा, संजय गौतम, मो. इकबाल, चन्द्रकला, सरिता त्रिपाठी, संध्या वर्मा, नीता सिंह, रूक्मिणी देवी, कमलेश कुमारी, रमेश चौधरी, सौरभ पदमाकर, सुदर्शन तिवारी, राजेश चौधरी, योगेश्वर शुक्ल, सूर्य प्रकाश शुक्ल, कन्हैयालाल भारती, लायका खातून, पार्वती, तरूण कुमार, कमलेश कुमारी,  सावित्री देवी के साथ ही हजारों की संख्या में शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक, रसोईया आदि शामिल रहे।

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