स्वास्थ्य विभाग का कारनामाः अपनों पर रहम गैरो पर सितम, अपनों को सेफ करने के जुगत मे विभाग
मामला प्रकाश मे आने के दो माह बाद भी चिट्ठी- चिट्ठी खेल रहा है विभाग
विभाग के लिए योगी सरकार के जीरो टेलरेंश नीति की उड रही धजिजयां
स्वास्थ्य माफियाओं की उंची पहुंच और गहरी पैठ के चलते कार्यवाही के लिए हिम्मत नही जुटा पा रहा है विभाग
नाजायज तरीके से कार्य करने वाले दोषी किसी भी दशा मे बख्शे नही जायेगे, होगी कार्यवाही- सीएमओ
रिर्पोट- शाहीन कुरैशी
कबीर बस्ती न्यूज
बस्ती। अपनों पर रहम गैरो पर सितम मशहूर गाने के तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग नक्शे कदम पर चल रहा हैं। कारण कि जिले मे असंख्य नाजायज अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेन्टर स्वास्थ्य विभाग के रहमों करम पर ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे नाजायज अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेन्टरों पर लगाम कसने की हिमाकत विभाग के आला अधिकारियों के पास नही हैं। जहां सेटिंग नही है वहां फौरी तौर पर कार्यवाही होने मे देर नही लगता। जिले के दर्जनों स्वास्थ्य माफियाओं का राजनीतिक पकड और नगदीें की गर्मी विभागीय अधिकारियों का दिल पिघला देने मे कारगर है।
हम बात कर रहे हैं जिला अस्पताल गेट नम्बर दो पर संचालित मार्डन अल्ट्रासाउंड सेन्टर का जो पीसी पीएनडीटी प्राविधान का खुला मजाक बना दिया है। यहां पंजीकृत चिकित्सक डाण् बलबिन्दर सिंह गायब हैं संचालक शिवम चौधरी को भी उनके बारे मे नही मालूम। वर्तमान मे कोई नितेश वर्मा नामक व्यक्ति अल्ट्रासाउंड कर रहा है जिसकी सूचना विभाग को भी नही है।
प्रेस की टीम ने मिल रही शिकायत का हकीकत जानने मार्डन अल्ट्रासाउंड सेन्टर पहुंची। जहां 800 रूपये भुगतान कर सहयोगी रिर्पोटर का अल्ट्रासाउंड कराया। शिकायत सौ प्रतिशत सही मिला। पूरा घटनाक्रम का वीडियो कैमरे मे कैद हो गया। वैसे तो मार्डन अल्ट्रासाउंड सेन्टर का पीसी पीएनडीटी की वैधता 7 नवम्बर 2026 तक है लेकिन पीसी पीएनडीटी मे दिए गये प्राविधानों से कोसो दूर है। यहां पंजीकृत चिकित्सक डाण् बलबिन्दर सिंह का कहीं अता पता नही है। रिर्पोटिंग मे पता चला कोई अन्य व्यक्ति यहां अल्ट्रासाउंड करता है। जिसका कोई विवरण विभाग के पास उपलब्ध नही है। बताया तो यहां तक जाता है कि मार्डन अल्ट्रासाउंड सेन्टर के प्रबन्धक द्वारा विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर धौंस दिखाया जाता है। अपने बडे रसूख का पाठ अधिकारियों को पढाया जाता है जिससे विभागीय अधिकारी भी किसी भी प्रकार का रिस्क लेने से बचते नजर आते हैं। अल्ट्रासाउंड सेन्टर के प्रबन्धन और विभागीय जुगलबन्दी ने मरीजों का जीवन संकट मे डाल रखा है। मरीजों की धनहानि तो हो ही रही है साथ ही उनके जीवन के साथ खुलेआम खिलवाड हो रहा है। जिसका कोई पुरसाहाल नही है। पूरे जिले मे यह एक प्रकार से अल्ट्रासाउंड सेन्टर के नाम पर बडा स्कैम चल रहा है। इस समचे स्कैम को लेकर जिला प्रशासन भी गंभीर नही है जबकि आये दिन गलत अल्ट्रासाउंड को लेकर अनेकों मामले प्रकाश मे आते रहते हैं। इस मामले के खुलासे के एक माह बाद भी स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही करने की हिम्मत नही जुटा सका। ऐसे मे स्वास्थ्य माफियाओं का मनोबल चरम पर है। अब विभाग के सामने यह समस्या हो गयी है कि बिल्ली के गले मे घण्टी बांधेगा कौन।
दूसरा मामला एक जाने माने झोलाछाप कथित वैध डा0 आर.डी. चौधरी का है जो नाक कान और गला रोग का इलाज करने का दावा करता है। इस मुन्नाभाई की बस्ती मण्डल के अलावा गोरखपुर और महराजगंज जनपदों मे दो दर्जन से अधिक क्लीनिक खोलकर मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड किया जा रहा हैं। जबकि हकीकत यह है कि झोलाछाप कथित वैध डा0 आर.डी. चौधरी के पास न तो कोई वैध डिग्री है और न ही क्लीनिक का कोई रजिस्ट्रेशन। फिर भी ऐसे मुना भाईयों पर विभाग कार्यवाही करने की हिम्मत नही जुटा पा रहा है। ऐसे गम्भीर मामलों मे स्वास्थ्य विभाग दो महीने से चिट्ठी- चिटठी खेल रहा है। जिसके कारण योगी यरकार के जीरो टेलरेंश नीति का लगातार क्रिया कर्म विभाग के द्वारा किया जा रहा है।
इस सम्बन्ध मे मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 राजीव निगम ने पूछने पर बताया कि उपरोक्त के सम्बप्ध मे नोडल अधिकारी को जांच कर कडी कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया था। अब तक कार्यवाही क्यों नही हो पायी है नोडल अधिकारी से पूछकर आपकों बताया जायेगा। उन्होेने कहा कि नाजायज तरीके से मरीजों के साथ खिलवाड करने वालों को किसी भी दशा मे बख्शा नही जायेगा।
