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पीसीपीएनडीटी पंजीकरण कहीं और संचालित हो रहा है कहीं और स्वास्थ्य माफियाओं को बचाने उतरा स्वास्थ्य विभाग

जीवन ज्योंति अल्ट्रासाउंड सेन्टर का पंजीकरण साउंघाट से संचालित हो रहा है 50 किमी दूर गोण्डा बभनान मे

गौर अल्ट्रासाउंड सेन्टर गौर का पंजीकरण पूर्णतया फर्जी, डाक्टर की डिग्री भी फर्जी पंजीकरण चौहछ्दी भी फर्जी

पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डा0 ऐ0के0 चौधरी को सौंपी गई है जांच रिर्पोट मिलते ही होगी कार्रवाही- डा0 राजीव निगम

संचालक कुलदीप दबे एक प्रतिष्ठित अखबार संस्थान को कर रहा है बदनाम

रिर्पोट- रंजीत उपाध्याय
कबीर बस्ती न्यूज

बस्ती। जिले में स्वास्थ्य माफियाओं के पौंबारह हैं इनकी हनक और चाबुक से जहां स्वास्थ्य महकमा भयभीत और दहशत मे है वहीं जिला प्रशासन भी इनके कारगुजारियों से हलकान है। हालत यह है कि बिल्ली के गले मे घण्टी बांधेगा कौन ? मसलन कार्रवाई करेगा कौन? यही कारण है कि जिले मे पीसीपीएनडीटी पंजीकरण को लेकर बडे स्तर पर फर्जीवाडा खुलेआम हो रहा है। जिसकी जानकारी सीएमओ तक को है लेकिन कार्रवाई करने मे विभाग के हाथ और पैर फूल रहे हैं। वहीं विभाग के आला अधिकारी भी इस फर्जीवाडे को जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं। कोई फर्जी पत्रकारिता का धौंस दिखाकर अधिकारियों को धमका रहा है तो कोई राजनीतिक दबगई के नाते विभाग पर भारी पड रहा है। हलांकि कार्रवाई करने वाले अधिकारी भी मजबूर होते हैं क्योंकि उनका भी पूंछ कहीं न कही दबा होता हैं। यही कारण है कि अधिकारी अपनी नौकरी बचाने मे लगे रहते हैं।
पहला मामला जीवन ज्योंति अल्ट्रासाउंड सेन्टर स्टेशन रोड बभनान का है। जिसका पीसीपीएनडीटी का रजिस्ट्रेशन बस्ती जिले के साउंघाट सीएचसी के पास का है मगर जिम्मेदार अधिकारियों के मिलीभगत से इस सेन्टर का संचालन बस्ती से 50 किमी दूर बभनान जनपद गोण्डा मे संचालित किया जा रहा है। जो पीसीपीएनडीटी एक्ट का घोर उल्लंघन है इतना ही नही यह कृत्य एक गंभीर श्रेणी के अपराध मे आता है। जीवन ज्योंति अल्ट्रासाउंड सेन्टर कस संचालक कथित डाक्टर कुलदीप दूबे है जो अपने आपको अमर उजाला अखबार का डुमरियागंज का संवाददाता बताता है और अपने पत्रकारिता का धौंस अधिकारियों पर भी जमाता है। हलांकि अमर उजाला अखबार ने स्पष्ट किया है कि कुलदीप दूबे नामक कोई व्यक्ति सिद्धार्थनगर जनपद मे संवाददाता के रूप मे कहीं कार्यरत नही है। और वह पूर्णतया फर्जी है। ऐसे लोगों को चिन्हित कर प्रशासन को कार्यवाही करनी चाहिए। इतना ही नही कलाकार कुलदीप दूबे ने जीवन ज्योंति अल्ट्रासाउंड सेन्टर के मेन बोर्ड पर संवाददाता डुमरियागंज अमर उजाला का नाम बोर्ड पर लिखा रखा है जिससे अधिकारियों पर दबाव बना रहे।संचालक कुलदीप दबे एक प्रतिष्ठित अखबार संस्थान को  बदनामकर रहा है।

दूसरा मामला है गौर अल्ट्रासाउंड सेन्टर गौर का । इसका भी पीसीपीएनडीटी पंजीकरण गौर बाजार के नाम से है यहां भी संचालक ने पीसीपीएनडीटी एक्ट की धज्जियां उडाते हुए गौर सीएचसी गेट पर संचालन कर रहा है। गौर अल्ट्रासाउंड सेन्टर गौर का पंजीकरण ही फर्जी डाक्टर के डिग्री पर हुआ है। यह जानते हुए भी विभाग कार्यवाही करने से घबरा रहा है। गौर अल्ट्रासाउंड सेन्टर गौर के संचालक को ही नही पता है कि पंजीकरण मे किस डाक्टर के डिग्री का इस्तेमाल किया गया है और सेन्टर धडलले से चल रहा है और सरकारी योजना के तहत यह गर्भवती महिलाओं का निःशुल्क अल्ट्रासाउंड भी करता है। जो गर्भवती महिलाओं के साथ बडा धोखा है। इस प्रकरण मे खबरें भी प्रमुखता से प्रकाशित हुई लकिन विभाग के कान पर जूं तक नही रेंगा। अधिकारी इन नाजायज सेन्टरों को बचाने लिए अपनी नौकरी तक कुर्बान करने को तैयार हैं यहां यह समझा जा सकता है कि इन स्वास्थ्य माफियाओं से विभागीय अधिकारियों का कितना मधुर सम्बन्ध है। मरीज व आम जनता भले ही भाड मे चला जाए इससे अधिकारियों को क्या फर्क पडता है।
इस सम्बन्ध मे मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 राजीव निगम ने कहा कि प्रकरण अत्यन्त गंभीर है मामले की जांच पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डा0 ऐ0के0 चौधरी को सौंपी गई है मामले शीघ्र रिर्पोट देने के निर्देश दिए गये हैं रिर्पोट आते ही सख्त कार्रवाही की जायेगी।