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जब डाक्टर ही बन जाये लुटेरा फिर कैसे हो मरीजों का उचित इलाज, 6 दिन मे जांच के नाम पर वसूले 45 हजार

बस्ती लाइफ लाइन हास्पिटल दक्षिण दरवाजा का मामला

हास्पिटल के प्रबन्धक डा0 तारिक एहसान खान कारनामा, अस्पताल बना उधोग

6 दिन के नवजात बच्चे के इलाज के नाम पर हुई जबरदस्त वसूली,

दबाव पर चिकित्सक ने बच्चे को किया डिस्चार्ज, वरिष्ठ समाजसेवी राना दिनेश प्रताप सिंह ने किया हस्ताक्षेप, सीएमओ को दिया सूचना

प्रकरण की सूचना मिली है शीघ्र जांच कराकर होगी कार्यवाही.- सीएमओ

रिर्पोट- सरोज देवी

कबीर बस्ती न्यूज

बस्ती। भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले जिले के कुछ चिकित्सक अब लुटेरा बन चुके हैं। ऐसे चिकित्सकों को न तो मरीजों के हित से मतलब है और न ही इंसानियत और मानवता से। ऐसे चिकित्सकों को सिर्फ मतलब है मरीजों और परिजनों से तरह तरह के जांचों और इलाज के नाम पर अवैध धन उगाही से। यदि मरीज की स्थिति सामान्य भी है तो उन्हें गंभीर बीमारी बता कर भय पैदा करने तथा मुहमांगा वसूली की जा रही है। ऐसे लुटेरे चिकित्सकों पर जिला प्रशासन शिकंजा कसने मे पूरी तरीके से नाकाम है। ऐसे चिकित्सक और अस्पताल आये दिन अपने काले कारनामों को लेकर सुर्खियों मे बने रहते हैं। हम बात कर रहे हैं बस्ती जिला अस्पताल से दक्षिण दरवाजा रोड पर स्थित बस्ती लाइफ लाइन हास्पिटल का। यहां बच्चों के इलाज का दावा किया जाता है। इस हास्पिटल के कर्ता धर्ता व प्रबन्धक डा0 तारिक एहसान खान हैं जो बच्चों के डाक्टर हैं। डा0 तारिक एहसान खान के काले कारनामों की खबरे आये दिन प्रकाशित होती रहती हैं। शिकायतों पर स्वास्थ्य प्रशासन जांच भी करता है और लीपापोती भी। लेकिन मरीजों और उनके परिजनों को न्याय कभी नही मिल पाता। जिसके कारण डाक्टर से लुटेरा बने लोगों पर कार्यवाही नही हो पाती और इन लोगों का मनोबल बढा रहता है।
बताते चलें कि बस्ती जिला अस्पताल से दक्षिण दरवाजा रोड पर स्थित बस्ती लाइफ लाइन हास्पिटल के चिकित्सक व प्रबन्धक डा0 तारिक एहसान खान के काले कारनामें आये दिन चर्चा मे रहते हैं। जिले के बहादुरपुर विकास खण्ड के सैरेया बुजुर्ग गांव के रहने वाले शब्बीर अहमद का 6 दिन का बच्चा बीमार होने के कारण पिता शब्बीर अहमद ने बस्ती लाइफ लाइन हास्पिटल ले गये जहां चिकित्सक डा0 तारिक एहसान खान ने बच्चे की स्थिति सीरियस बताते हुए अपने अस्पताल मे भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। पिता शब्बीर अहमद के अनुसार छठवें दिन बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ्य होने के बाद भी उक्त डाक्टर ने बताया कि बच्चा अभी भी ज्यादा सीरियस है अभी बच्चे को 15 दिन भर्ती रखना पडेगा। इस पर शब्बीर अहमद ने कहा कि बच्चा स्वस्थ्य है उसे डिस्चार्ज करन का अनुरोध किया। इस पर डा0 तारिक एहसान खान भडक गये और बच्चे को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया और वू पिता को धमकी देने लगे। इस घटना से आहत शब्बीर अहमद ने समाजसेवी राना दिनेश प्रताप सिंह को मामले से अवगत कराया। प्रकरण की सम्पूर्ण जानकारी होने के बाद समाजसेवी राना दिनेश प्रताप सिंह ने सीएमओ के सीयूजी नम्बर पर प्रकरण को प्रेषित कर उचित कानूनी कार्यवाही का अनुरोध किया। दबाव पडते ही चिकित्सक ने तो बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया लेकिन 6 दिन मे शब्बीर अहमद से लगभग 40 से 45 हजार रूपये दबाव बनाकर कर वसूल लिए। अब इस मामले मे प्रशासन ऐसे चिकित्सक के विरूद्व क्या कार्यवाही करेगा यह तो समय बताएगा। लेकिन इस अस्पताल के लूट खसोट से मरीज व उनके परिजन बच पायेंगे यह सम्भव नही लगता। अभी 6 महीने पूर्व इसी चिकित्सक के कारनामे को लेकर एक पभ्िउत ने शिकायत किया था। लेकिन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए डा0 तारिक एहसान खान गंभीर मामले को दबाने छिपाने मे सफल रहे। यहां यह कहना गलत नही होगा कि यह अस्पताल बच्चों के इलाज के लिए नही बल्कि एक उधोग के रूप मे फल फूल फूल रहा है।
इस सम्बन्ध मे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 राजीव निगम ने बताया कि प्रकरण की सूचना मिली है लेकिन पीडित पक्ष का अभी कोई शिकायत पत्र प्राप्त नही हुआ है। शिकायती पत्र मिलते ही शीघ्र कार्रवाई की जायेगी। अस्पताल के बेजा गतिविधियों को नियंत्रण किया जायेगा।