कोरोना काल में मरीजों की सेवा के साथ काव्य सृजन करने वाले डा. वी.के. वर्मा को ‘राष्ट्रीय काव्य शिखर’ सम्मान

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

गुरूवार को काव्यमुखी साहित्य परिषद उ.प्र. के बस्ती शाखा द्वारा प्रेस क्लब सभागार में कोरोना संकट काल के दौरान चिकित्सा के साथ ही कोरोना पर नियमित काव्य सृजन करने वाले डा. वी.के. वर्मा को उनके योगदान के लिये ‘ राष्ट्रीय काव्य शिखर’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि सेवा निवृत्त सहायक सूचना निदेशक डॉ. दशरथ प्रसाद यादव ने कहा कि नियति कठिन समय में सबको सृजन के अवसर नहीं देती, डा. वी.के. वर्मा ने संकट काल में सृजन  कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। काव्यमुखी साहित्य परिषद के प्रान्तीय महासचिव एवं वरिष्ठ कवि डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी दीपक ने कहा कि डा. वी.के. वर्मा में सजग कवि सदैव सक्रिय रहता है, यही कारण है कि जब भारत समेत पूरी दुनियां घरों में दुबकी थी वे निर्भय होकर मरीजों की सेवा के साथ ही कवि धर्म का भी निर्वहन कर रहे थे। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने कहा कि डा. वर्मा द्वारा कोरोना काल में लिखी कविताओं ने सोशल मीडिया पर लोगों को साहस दिया। उनका यह प्रयास अनुकरणीय है। प्रदीप चन्द्र पाण्डेय ने कवि धर्म की पीडा, अभिव्यक्ति के स्वर पर प्रकाश डाला।
सम्मान से अभिभूत डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि निश्चित रूप से कोरोना संकट का समय बहुत डरावना था किन्तु एक चिकित्सक होने के नाते मैं जिम्मेदारियों से कैसे भाग जाता। फुरसत के क्षणों में जो भाव मन में आये वही कविता बनकर फूट पड़े।
इसी क्रम में श्याम प्रकाश शर्मा, ओम प्रकाश मिश्र, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, सुदामा राय आदि ने डा. वी.के. वर्मा के व्यक्तित्व, कृतित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन, मुशायरे का आयोजन साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला की अध्यक्षता और वरिष्ठ कवि डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ के संचालन में मां सरस्वती की वंदना से हुआ। कवि सम्मेलन में डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ विनोद उपाध्याय, डा. अफजल हुसेन अफजल, सागर गोरखपुरी, अनुरोध श्रीवास्तव, रहमान अली रहमान, सुमन सागर, डा. वी.के. वर्मा अजीत श्रीवास्तव ‘राज’ सुशील सिंह, सरोज सिंह आदि ने काव्य पाठ कर वातावरण को सरस बना दिया। डा. रामकृष्ण लाल जगमग की रचना ‘ कहा द्वारिका से फुरसत थी जो तुम वृन्दावन में आते, कहां तुम्हें फुरसत जो देखो राधा की आंखों का पानी’ के माध्यम से श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम को दार्शनिक रूप से प्रस्तुत किया जिसे सराहा गया। कार्यक्रम में अनेक श्रोता व कवि उपस्थित रहे। संस्थाध्यक्ष डा. अफजल हुसेन अफजल ने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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