Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
अराजकता व अपराध के आग मे झुलस रहा है बस्ती का रेलवे स्टेशन रेलवे स्टेशन पर अवैध धन उगाही पर किया सवाल तो पत्रकार को मिली जान से मार देने की धमकी घारी मे टीनशेड के नीचे बिना पंजीकरण के चल रहा है कथित मेडिकल कालेज, तमाशबीन बना स्वास्थ्य प्रशासन सीएमओ का नटवरलाल स्टेनो अनिल चौधरी का कारनामाः 15 दिनो तक दबा कर बैठा रहा सीएमओ का जांच आदेश जब डाक्टर ही बन जाये लुटेरा फिर कैसे हो मरीजों का उचित इलाज, 6 दिन मे जांच के नाम पर वसूले 45 हजार पीसीपीएनडीटी पंजीकरण कहीं और संचालित हो रहा है कहीं और स्वास्थ्य माफियाओं को बचाने उतरा स्वास्थ्य वि... न पंजीकरण न टेक्नीशियन फिर भी विभागीय संरक्षण मे हो रहा डिजिटल एक्स-रे और ईसीजी, लूटे जा रहे निरीह म... पीसीपीएनडीटी का पंजीकरण कहीं और अल्ट्रासाउंड सेन्टर संचालित हो रहा है कहीं और, जिम्मेदार गंभीर मामलो... हीमोडायलसिस यूनिट कैली मे मरीजों के जान से हो रहा है खिलवाड, प्रशासन कुम्भकर्णी नींद मे समाज का प्रत्येक नागरिक समान अधिकारों का अधिकारीः आनन्दीबेन पटेल

विविधताओें को सहेजे विलक्षण कवि है डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’

सम्मान के साथ व्यक्त्तिव पर विमर्श

कबीर बस्ती न्यूज:

बस्ती । वरिष्ठ कवि, अनेक पुस्तकांे के रचयिता डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ के साहित्यिक योगदान पर परिचर्चा का आयोजन प्रेमचन्द्र साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा कटरा स्थित हर्षित क्लब में किया गया।
वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ देश के प्रसिद्ध कवि है, कवि मंचों पर हास्य व्यंग्य के साथ ही वे वर्तमान संगति, विसंगति पर करारी चोट करते हैं। कहा कि उनकी कृति ‘चाशनी’, ‘किसी की दिवाली, किसी का दिवाला’, ‘सच का दस्तावेज’ बच्चों को समर्पित ‘बाल सुमन’ प्रकाशित हो चुकी है। वे स्वंय में  विविधताओें को सहेजे विलक्षण कवि है। विनोद उपाध्याय ‘हर्षित’ ने कहा कि डा. जगमग ने सदैव युवा पीढी का मार्ग दर्शन किया। उनकी रचनाओं में समाज का सच प्रकट होता है।
अपने व्यक्तित्व, कृतित्व पर आयोजित परिचर्चा में डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि उन्होने जो देखा, समझा, महसूस किया उसे रचना में ढाल दिया। इन दिनों स्वामी विवेकानन्द पर महाकाव्य का लेखन चल रहा है जो शीघ्र प्रकाशित होकर पाठकांें के बीच होगी। इस अवसर पर प्रेमचन्द्र साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ को उनके योगदान के लिये सम्मानित किया गया।
अध्यक्षता करते हुये डा. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने कहा कि डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने जो पहचान श्रोताओं के बीच बनाया है वह अन्य कवियों के लिये दुलर्भ है। परिचर्चा में सुशील सिंह पथिक, राजेन्द्र राही, अजीत राज, जगदम्बा प्रसाद भावुक, सुधीर श्रीवास्तव आदि ने डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ के रचना संसार पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य रूप से लवकुश सिंह, सर्वेश श्रीवास्तव, राजेन्द्र प्रसाद उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।