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क्रूरता की सारी हदें पार कर रहा है मेडिकल कालेज,लाशों मे तब्दील होते जा रहे हैं मरीज

  • एक अप्रैल से अब तक इलाज मे लापरवाही से हो चुकी है 162 मरीजों की अकाल मौत. ईएमओ
बस्ती।  ओपेक चिकित्सालय कैली की स्थिति ठीक नही है। ओपेक चिकित्सालय कैली मेडिकल कालेज क्रूरता की सारी हदें पार कर रहा है। मरीज लाषों के ढेर मे तब्दील हो रहे हैं। चारों तरफ चीख-पुकार मचा हुआ हुआ है। जिला प्रषासन व आला अधिकारी लाशों  पर राजनीति कर रहे हैं। भाजपा नेताओं व स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक के दावों की जमीनी हकीकत बड़ी भयावह है। आलम ये है कि मरीजों को भीर्ती कराने और उन्हे आक्सीजन उपलब्ध करवाने में रसूखदारों के भी छक्के छूट जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में उलझकर बड़ी मशक्कत के बाद अगर कोई अपना मरीज एडमिट भी करा लेता है तो उसकी देखरेख उचित ढंग से नही हो रही है।
       आरोप यहां तक है कि रात में पाइप लाइन से दी जाने आक्सीजन का फ्लो कम कर दिया जाता है। इस खेल में मरीज तड़पकर मर जाते हैं। आक्सीजन बचाकर किसे दिया जाता है, समझ से परे है। इतना ही नहीं अस्पताल कैम्पस में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी है जो तीमारदारों की अक्सर पिटाई कर देती है। सोनूपार निवासी विजय द्विवेदी ने 03 मई की रात 12.00 बजे पुलिसिया खौफ की वीडियो शेयर कर हकीकत सार्वजनिक किया था। जिलाधिकारी आये दिन कैली अस्पताल पहुंचकर चाक चौंबंद व्यवस्था का निर्देश देती हैं।
      उनके निर्देशों का असर ये है कि डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल के प्रतिनिधि उमेश श्रीवास्तव 6 घण्टे तक चिरउरी करते रहे, उनका मरीज एडमिट नही किया गया, और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी अस्पताल के बाहर उनको आक्सीजन लगाने आया। तमाम कोशिशों के बाद निजी प्रयासों से आक्सीजन सिलेण्डर मिला, लेकिन उनके पास रेगूलेटर नही था, उमेश श्रीवास्तव ने रेगूलेटर की डिमांड की लेकिन कामचोरी का आलम ये रहा कि कोई बाहर अस्पताल परिसर में रेगूलेटेर लेकर नही आया और करीब 12.00 मरीज के सांसें थम गयीं।
        ऐसा ही कुछ शिक्षक नेता संजय द्विवेदी के साथ हुआ। उनकी चाची और भाई कोविड पाजिटिव थे। संजय द्विवेदी बाहर थे जबकि उनके बड़े भाई विजय द्विवेदी अपनी चाची और उनके बेटे की जान बवाने की जद्दोजेहद में लगे थे। मरीजों को एडमिट कराने के लिये दोनो भाइयों ने शाम 6 बजे से लेकर रात 1.00 बजे तक एड़ी चोटी एक कर दिया, मुश्किल से एडमिट करा पाये। इस बीच अस्पताल में तैनात पुलिस फोर्स ने तीमारदारों  को दो बार पीट कर बाहर निकाल दिया। हालात का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
      सामने मौत खड़ी हो और एक व्यक्ति जो आपको ढाढ़स बंधाने के लिये पास खड़ा हो, उसे मार पीटकर भगा दिया जाये तो सासें अपने आप अटक जायेंगी। ऐसे हालात रोज बन रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार है कि बेशर्मी पर उतारू हैं। रोज दर्जन भर से ज्यादा मौतें हो रही हैं। सही आंकड़े भी नही दिये जा रहे हैं। इमरजेंसी प्रभारी डा. जीएम शुक्ला ने कहा 01 अप्रैल से आज तक कुल 162 लोगों की मौत हो चुकी हैं। जबकि अनेकों मरीज अस्पताल परिसर में ही दम तोड़ देते हैं, उन्हे आक्सीजन और बेड नही मिलते।
      भाजपा  सांसद हरीश द्विवेदी ने ने दावा किया था, कि कोई मरीज वापस नही किया जायेगा। इन दावों के बाद रसूखदारों के साथ ऐसा हो रहा है तो साधारण प्रोफाइल के लोगों के साथ क्या होता होगा ? उपरोक्त संदर्भों में मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डा. नवनीत कुमार ने बताया कि मेडिकल कालेज में 60 बेड के लिये पाइपलाइन से आक्सीजन की व्यवस्था दी गयी है जबकि निजी प्रयासों से 120 बेड की व्यवस्था संचालित है। यहां प्रतिदिन 500 सिलेण्डर की खपत है जबकि। इनकी ढुलाई के लिये 10 वाहन आरक्षित हैं। इसकी उच्च सतर पर मॉनीअरिंग हो रही है। कहा कि ये आरोप गलत है कि इलाज के अभाव में मरीजों की मौत हो रही है।

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