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कोविड रोगियों के लिए आशा की किरण है आयुष- 64

– आशा कार्यकर्ता, एएनएम व अन्य चिकित्सकों को दें कोविड किट की जानकारी

– संतकबीरनगर व बस्ती के आयुष चिकित्सकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ

कबीर बस्ती न्यूज,संतकबीरनगर।उ0प्र0।

पूर्व सर्विलांस अधिकारी तथा आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ ए के सिन्हा ने बताया कि देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों का मानना है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फार्मूला आयुष 64, लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार के सहयोग में लाभकारी है। कोरोना महामारी के विश्वव्यापी कहर के बीच ‘आयुष 64’ दवा हल्के और मध्यम कोविड संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की एक किरण के रूप में उभरी है।

यह बातें उन्होने उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी ( आयुष मन्त्रालय ) के तत्वावधान में श्रीट्रान इण्डिया मेयर्स इंटिको टेक्टनिकल सर्विस द्वारा आयोजित संतकबीरनगर और बस्ती जनपद के विभिन्न ब्लाकों व जिला चिकित्सालयों में कार्यरत आयुष चिकित्सकों के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान कहीं। उन्होने बताया कि आयुष 64 मूल रूप से मलेरिया की दवा के रूप में वर्ष 1980 में विकसित की गई थी और कोरोना संक्रमण के लिए काम में ली गई है। आयुष 64, सप्तपर्ण, कुटकी, चिरायता एवं कुबेराक्ष औषधियों से बनी है। आयुष 64 के उपयोग से संक्रमण के जल्दी ठीक होने और बीमारी के गंभीर होने से बचने के संकेत मिले हैं। उन्होने चिकित्सकों से कहा कि यह जानकारी सभी आयुष चिकित्सक अपने अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता व एएनएम को दें जिससे वे इसका बेहतर उपयोग कर सकें।

इस दौरान प्रशिक्षण दे रहे डॉ राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि संशमनी वटी का निर्माण गिलोय की छाल से किया जाता है। यह सभी प्रकार के बुखार में विशेष लाभ पहुंचाती है। साधारण बुखार, टायफाइड, पित्त दोष, अत्यधिक प्यास लगने की समस्या, हाथ-पैर में होने वाली जलन आदि में संशमनी वटी से लाभ मिलते हैं। संशमनी वटी का प्रयोग सभी प्रकार के ज्वर में किया जाता है। बुखार के उपचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण दवाओं में से एक है। इसके अलावा भी संशमनी वटी का इस्तेमाल अन्य कई रोगों में भी किया जाता है, जो ये है। सभी लोग कभी ना कभी बुखार से पीड़ित होते हैं। कई लोगों को यह भी शिकायत रहती है कि उन्हें बार-बार बुखार आता है। आप बुखार को ठीक करने के लिए संशमनी वटी का प्रयोग कर सकते हैं। संशमनी वटी का उपयोग सभी प्रकार के बुखार में लाभदायक होता है। विशेषतः पुराने बुखार एवं टीबी के बुखार में संशमनी वटी से तुरंत ही लाभ मिलता है। टायफाइड में भी संशमनी वटी से लाभ पहुंचाता है। इसके लिए घन में एक चौथाई अतिविषा का चूर्ण मिला दें। इसकी दो – दो रत्ती की गोलियाँ बना लें। 5-10 गोली जल के साथ देने से विषम ज्वर यानि टॉयफॉयड में बहुत आराम मिलता है ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन व संयोजन शुभम मिश्रा ने किया। इस दौरान संतकबीरनगर के आयुष चिकित्सक डॉ कमलेश चन्द्रा, डॉ विवेक श्रीवास्तव, डॉ नूर आलम, डॉ मजहर हुसैन, डॉ सलीम, डॉ अश्वनी यादव, डॉ राजेश यादव, डॉ कमलजीत, डॉ दीपक श्रीवास्तव, डॉ मनोज वरुण बस्ती के डॉ वन्दना तिवारी, डॉ मनोज यादव, डॉ भगवान स्वरुप, डॉ राम कृष्ण द्विवेदी, डॉ इन्द्रदेव चौधरी, डॉ विनोद शर्मा, डॉ उमेश, डॉ योगेश, डॉ प्रदीप यादव, डॉ उत्तम सिंह, डॉ पारसनाथ, डॉ श्वेता, डॉ नीरज त्रिपाठी, डॉ अमित पाण्डेय, डॉ श्रद्धा सिंह, डॉ नीरज, डॉ देवेन्द्र, डॉ मनोज, डॉ सुनील सौरभ, डॉ रिमझिम, डॉ नीलम चौधरी, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ प्रदीप शुक्ला, डॉ दीपिका सचान, डॉ अमीश कुमार, डॉ पल्लवी, डॉ भावना गुप्ता, डॉ संजय श्रीवास्तव, डॉ सतीश चौधरी समेत अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।