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ऐसे टिप्स अपना कर अपने धान के फसल को रखें विभन्न रोगों से दूर

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

खरीफ की मुख्य फसल धान में बालियॉ निकलना प्रारम्भ हो गयी है और इसी समय धान की फसल में विभिन्न प्रकार के रोग एवं कीट का प्रकोप अधिक होता है। उक्त जानकारी देते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया है कि धान की फसल में इस समय सैनिक कीट, हल्दिया रोग, गन्धी बग कीट, जीवाणु झुलसा रोग, तना छेदक एंव फुदका कीट तेजी से फसलों पर संक्रमण कर नुकसान पहुॅचाते है।
उन्होने बताया कि सैनिक कीट सूड़िया भूरे रंग की होती है, जो दिन के समय किल्लों के मध्य अथवा भूमि की दरारों छिपी रहती है तथा शाम को निकल कर पौधों की बालियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर नीचे गिरा देती है। इस रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेडाजिम 50 प्रति डब्लूपी 500 ग्राम या एडीफेनफॉस 50 प्रतिशत ई0सी0 500 मिली या हेक्साकोनाजोल 05 प्रतिशत ई0सी0 01 लीटर या मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 02 किग्रा0 को 500 से 750 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पानी में घोलकर छिड़काव करें।
उन्होने बताया कि फाल्स स्मट या मिथ्या कडुआ रोग (हल्दिया रोग) के नियंत्रण हेतु कापर आक्सीक्लोराइड 77 प्रतिशत, डब्लू0पी0 02 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर अथवा पिकोसीस्ट्रोबिन 7.05 प्रतिशत और प्रोपीकोनाजाल 11.7 प्रतिशत, एस0सी0 01 किग्रा0 अथवा कार्बेडाजिम 50 प्रति डब्लू0पी0 500 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 500 से 700 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।
उन्होने बताया है कि गन्धी बग कीट एवं सैनिक कीट के नियत्रंण के लिए किसान भाईयों को कीटनाशक दवा जैसे पैराथियान 02 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा0 व मैलाथियान 05 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा0 या फेनबलरेट 0.04 प्रति धूल 20 से 25 किग्रा0 रसायन को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से भुरकाव करें।
उन्होने बताया कि जीवाणु झुलसा रोग को ब्लाइट रोग के नाम से जाना जाता है। इस रोग में पत्तिया नोक से अथवा किनारे के तरफ से सूखना प्रारम्भ कर नीचे की तरफ सूखती है। इसके नियंत्रण के लिए स्टेप्टोमाइसीन सेल्फेट 90 प्रति 15 ग्राम एवं कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रति डब्लू0पी0 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 400 से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कराना चाहिए।
उन्होने बताया कि तना छेदक कीट तनों में घुसकर मुख्य सूट को क्षति पहुचाती है, जिससे बाली आने पर बाली सफेद हो जाती है। इसके नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरान थ्रीजी 20 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए तथा फुदका कीट हरा-भूरा एवं सफेद पीठ वाला अत्यन्त विनाशकारी है। इसके प्रकोप से पौधो झुलसे दिखायी देते है। फुदका कीट नियंत्रण के लिए कार्बोफ्यूरान थ्रीजी 20 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा क्युनालफॉस 25 प्रति ई0सी0 1.5 लीटर या क्लोरपारिफॉस 20 प्रति ई0सी0 1.5 लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति एस0एल0 1.25 मिली0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए