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श्रीराम के पत्थर छूते ही सुन्दर नारी बनी अहिल्या तो श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा प्रेक्षागृह

रामलीलाः विश्वामित्र ने राम लक्ष्मण को माँगा, ताड़का और मारीच- सुबाहु का हुआ वध, ऋषि के साथ राम पहुँचे जनकपुर

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

सनातन धर्म संस्था और श्री रामलीला महोत्सव आयोजन समिति की ओर से अटल बिहारी वाजपेई प्रेक्षागृह में चल रहे श्रीराम लीला के तीसरे दिन मुनि आगमन, ताड़का व मारीच-सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, गङ्गा अवतरण, नगर दर्शन और फुलवारी भ्रमण सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन हुआ। कार्यक्रम के दौरान बरसात के बाद भी भारी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। ताड़का का वध होने और श्री राम का पैर छूते ही शिला से अहिल्या सुंदर नारी बनी तो जय श्री राम के नारे गूँज उठे। भगवान श्री राम लक्ष्मण और विश्वामित्र के आरती से शुरू हुई रामलीला में श्री भगवान जी की आरती अतिथियों ने किया।

समिति के सदस्य सुभाष शुक्ल ने भूमिका रखते हुए बताया कि ऋषि, मुनि, ब्रह्मण गौ व महिलाओं की रक्षा करना राजा का दायित्व है जिसे भगवान श्री राम ने अपने लीला के माध्यम से हम सबको बताया है। उन्होंने बताया कि हम अपने बच्चों को भगवान श्री राम के जीवन पर आधारित जीवन जीने के लिए प्रेरित करें उन्हें नैतिकता, सदाचार व शस्त्र और शास्त्र की विद्या का ज्ञान दें जिससे वो धर्म और राष्ट्र की रक्षा कर सकें। रामलीला मंचन में व्यास कृष्णमोहन पाण्डेय, निर्देशक विश्राम पाण्डेय ने कथा सूत्र पर प्रकाश डालते हुये बताया कि गुरु विश्वामित्र राजा दशरथ के पास अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने राजा दशरथ से कहा कि राक्षस उनके यज्ञ में व्यवधान डाल रहे हैं।

यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेजा जाए। राजा दशरथ ने कहा कि राम और लक्ष्मण उन्हें प्राणों से प्यारे हैं छोटे बालक किस प्रकार से राक्षसों से उनकी रक्षा कर पाएंगे। वे चाहें तो सेना भेज दी जाएगी। लेकिन जब गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझाया कि राम और लक्ष्मण यज्ञ की रक्षा के साथ ही विश्वामित्र से धनुष यज्ञ का ज्ञान भी हासिल करेंगे तो राजा दशरथ ने राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेज दिया। राम और लक्ष्मण ने यज्ञ की रक्षा की। यहां ताड़का सहित कई राक्षसों का बध किया। जनक के यहां से निमंत्रण आने पर विश्वामित्र जब राम और लक्ष्मण को लेकर जा रहे थे तो रास्ते में एक पत्थर चमकता हुआ नजर आया।

राम ने पूछा कि गुरु यह क्या है तो विश्वामित्र ने बताया कि यह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या है जो श्राप के कारण शिला बन गई हैं। राम तुम इसका उद्धार करो। श्री राम ने जैसे ही शिला को अपना पैर लगाया वह अहिल्या के असली स्वरूप में आ गई। यह देखते ही उपस्थित भक्तों ने श्रीराम के जयकारे लगाए। ’व्यास द्वारा गए तहाँ जह पावन गंगा’ चौपाई के साथ गंगावतरण की लीला शुरू हुई। मुनि ने राम और लक्षमण को भागीरथ द्वारा पृथ्वी पर गंगा को लाने की कहानी बताई। इसके बाद ’नाथ लखन पुर देखन चाहहि’ के साथ गुरू की आज्ञा से राम और लक्ष्मण जनकपुर नगर दर्शन को गए।

मंच पर फुलवारी की लीला शुरू होते ही सीताजी सखियों संग गौरी पूजन के लिए आती हैं। जहां ’सुन सिय सत्य आशीष हमारी। पूजहि मन कामना तुम्हारी’ के साथ सीता जी को मनोकामना पूरी होने की आशीष गौरी देती है। फुलवारी में ही राम-सीता मिलन का सुखद संयोग आता है। श्रीरामजी लक्ष्मण जी को सीता का परिचय कराते हैं। सीता जी गौरी माता के पूजन के बाद महल की ओर प्रस्थान करती हैं। मंगलवार की लीला को यहीं विराम दिया जाता है। बुधवार में भव्य रूप से धनुष यज्ञ महामहोत्सव के आयोजन की घोषणा दर्शकों में समिति की ओर से किया गया। दर्शकों में राणा दिनेश प्रताप सिंह, अनिल मिश्र, राहुल त्रिवेदी, भोलानाथ चौधरी, नरसिंह दूबे, रोहन दूबे, परमेश्वर शुक्ल, राजेश चित्रगुप्त, प्रमोद गाडिया, रमेश सिंह, अखिलेश दूबे, बृजेश सिंह मुन्ना, अमन, अंकित, अभय, शशांक आदि शामिल रहे।