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श्रीराम लीला के सातवें दिन शूर्पणखा नासिका भंग, खर दूषण वध, सीता हरण सहित विभिन्न लीलालों का मंचन

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

सनातन धर्म संस्था और श्री रामलीला महोत्सव आयोजन समिति की ओर से अटल बिहारी वाजपेई प्रेक्षागृह में चल रहे श्रीराम लीला के सातवें दिन शूर्पणखा नासिका भंग, खर दूषण वध, सीता हरण, जटायु मरण, शबरी उद्धार, सुग्रीव मित्रता, बाली वध सहित विभिन्न लीलालों का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम जी की आरती से शुरू हुई रामलीला की भूमिका पर प्रकाश डालते हुये पंकज त्रिपाठी ने कहा कि चित्रकूट से आगे चलने पर भगवान श्रीराम ने ऋषि मुनियों के कष्ट जानकर भारतभूमि को राक्षसों से मुक्त करने का प्रण ले लिया था। ‘निश्चर हीन करहु महि, भुज उठाई प्रण कीन्ह।’

चित्रकूट से पंचवटी के रास्ते में एक मात्र कबंध राक्षस से ही युद्ध हुआ जिसका उन्होंने बध किया। पंचवटी में यदि सूर्पनखा युद्ध करने आती तब तो ताड़का की तरह उसका भी बध ही किया जाता किन्तु वह तो प्रणय निवेदन लेकर उपस्थित हुई थी इसलिए उसे विरूपित कर छोड़ दिया गया। उन्होंने आये हुये दर्शकों से बच्चों में भगवान राम की तरह संस्कार देने की बात कही, उन्होंने दर्शकों को श्री रामलीला महोत्सव में बड़ी संख्या में आने पर धन्यवाद दिया। रामलीला मंचन में व्यास कृष्ण मोहन पाण्डेय, विश्राम पाण्डेय ने कथा सूत्र पर प्रकाश डालते हुये बताया कि पंचवटी में सूर्पनखा घूमते हुए पहुंचती है। वह राम-लक्ष्मण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है।

लेकिन श्री राम उसके छल-कपट को पहचान कर अनुज लक्ष्मण के पास भेज देते हैं। लक्ष्मण द्वारा विवाह से मना करने पर वह क्रोधित होकर अपने असली राक्षसी रूप में प्रकट हो जाती है। श्री राम का संकेत पाते ही लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट दिए। रावण की बहन सूर्पणखा की नाक कटते ही तालियों की गड़गड़ाहट से प्रेक्षागृह में गूंज उठा। नाक-कान कटने के बाद वह खर दूषण के पास जाती है। खर दूषण राम-लक्ष्मण से युद्ध करने आते हैं और दोनो ही मारे जाते हैं। शूर्पणखा के उलाहने पर पहुंचे राक्षस खर-दूषण का सिर जैसे ही धड़ से अलग हुआ तो लोगों ने पुष्प वर्षा शुरू कर दी।

शूर्पणखा रोते हुए रावण के पास पहुंचती है और कहती है ‘अरे मूढ़ मदपान कर सोता है दिन रात, शत्रु सिर पर आ गया, तुझे नही ज्ञात।’ इसके बाद शूर्पणखा पूरा वृतांत रावण को बताती है। खर दूषण के वध के बारे में भी बताती है। तब रावण सूर्पनखा के अपमान का बदला सीता हरण करके लेने को कहता है। वह मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर भेजता है। जब राम उस मृग को मारने के लिए जाते हैं और मारीच के कपट के कारण लक्ष्मण भी राम के सहयोग में जाते हैं। तब रावण साधु वेश धारण कर कपट के द्वारा सीता का हरण कर के लंका ले आता है। व्यास कृष्ण मोहन पाण्डेय ने कहा सीता लक्ष्मण रेखा नहीं लांघती तो रावण कभी हरण नहीं कर सकता था।

आज भी ऐसे बहुत से मायावी रावण घूम रहे हैं, इनसे समाज को सतर्क रहना होगा। प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण, सीता जी की खोज में आगे बढ़ते हैं तब घायल अवस्था में पड़े गीध जटायु से होती है, गीधराज जटायु सीताहरण का पूरा वृतांत सुनाते हैं और राम राम कहते हुये प्रभु की गोद मे प्राण त्याग देते हैं, प्रभु राम और लक्ष्मण जटायु का अंतिम संस्कार कर आगे बढ़ते हैं और शबरी आश्रम पहुंचते हैं, जहां पर शबरी प्रेम से जूठे बेर प्रभु को खिलाती है, जिसे प्रभु चाव से खाते हैं तथा लक्ष्मण से भी खाने को कहते हैं परंतु लक्ष्मण जूठा समझकर फेंक देते हैं, प्रभु श्रीराम शबरी को नवथा भक्ति का उपदेश देते हुए भक्ति प्रदान करते हैं।

वहीं, राम-सुग्रीव मित्रता में दिखाया गया कि किष्किंधा पर्वत पर निराश्रित जीवन यापन कर रहे सुग्रीव ने जब जंगल में राम और लक्ष्मण को भटकते हुए देखा तो हनुमान को उनका भेद जानने के लिए भेजा। हनुमान श्रीराम और लक्ष्मण को सुग्रीव से मिलाते हैं और श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता करा देते हैं। इस पर राम सुग्रीव को बाली का वध कर उसे राजा बनाने का वचन देते हैं।इसके बाद श्रीराम बाली का वध कर देते हैं। कार्यक्रम के बीच में बच्चों ने प्रश्नोत्तरी कर लोगों को रामायण के ज्ञान से परिचित कराया। दर्शकों में राजेन्द्रनाथ तिवारी, शुशील मिश्र, अशोक श्रीवास्तव, धीरेंद्र सिंह, रमेश सिंह, सुभाष शुक्ल, अखिलेश दूबे, संतोष श्रीवास्तव, हरीश त्रिपाठी, दयाभान सिंह, बृजेश सिंह मुन्ना, बागीश शुक्ल, रामजी पांडेय, अनुराग शुक्ल, अनिल मिश्र, भोलानाथ चौधरी, अमन, सौरभ, शशांक, अभय, जॉन पांडेय, आदि शामिल रहे।