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श्री चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज ने किया कलम दवात का पूजा

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा सत्यवानपुरी में स्थित  श्री चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज द्वारा कलम दवात की पूजा की गई। मुख्य पुजारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने पूजन  संपन्न कराया। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मनमोहन श्रीवास्तव काजू ने कहा कलम पूजा का इतिहास बहुत ही पुराना है जो आज के युवाओं और आज के पीढ़ियों को जानना बहुत जरूरी है, उन्होंने कहा
जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छुट जाने से नाराज भगवान् चित्रगुप्त ने रख दी  थी कलम !!उस समय परेवा काल शुरू हो चुका था
 परेवा के दिन कायस्थ समाज कलम का प्रयोग नहीं करते हैं  यानी किसी भी तरह का का हिसाब – किताब नही करते कहते है जब भगवान् राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राजसिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवीदेवता आ गए तब भगवान् राम ने अपने अनुज भरत से पूछा भगवान चित्रगुप्त नहीं दिखाई दे रहे है इस पर जब खोज बीन हुई तो पता चला की गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवा न चित्रगुप्त को निमत्रण पहुंचाया ही नहीं था जिसके चलते भगवान् चित्रगुप्त नहीं आये I इधर भगवान् चित्रगुप्त सब जान  चुके थे और इसे प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे । फलस्वरूप उन्होंने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर किनारे रख दिया I
सभी देवी देवता जैसे ही राजतिलक से लौटे तो पाया की स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गये थे , प्राणियों का का लेखा जोखा ना लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था की किसको कहाँ भेजे I तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने अयोध्या में भगवान् विष्णु द्वारा स्थापित किया और गुरु वशिष्ठ के साथ जाकर भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की और गुरु वशिष्ठ की गलती के लिए क्षमायाचना की, जिसके बाद  भगवान राम के आग्रह मानकर भगवान चित्रगुप्त ने लगभग 4 पहर 24 घंटे बाद  पुन: कलम दवात की पूजा करने के पश्चात उसको उठाया और प्राणियों का लेखा जोखा लिखने का कार्य आरम्भ किया I कहते तभी से कायस्थ दीपावली की पूजा के पश्चात कलम को रख देते हैं और यमदुतिया के दिन भगवान चित्रगुप्त का विधिवत कलम दवात पूजन करके ही कलम को धारण करते है
कहते है तभी से कायस्थ ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय हुए और इस घटना के पश्चात मिले वरदान के फलस्वरूप सबसे दान लेने वाले ब्राह्मणों से  दान लेने का हक़ सिर्फ कायस्थों को ही है।
पूजन करने वालों में अजीत श्रीवास्तव, परमात्मा श्रीवास्तव महातम लाल हर्षित श्रीवास्तव ऋषभ श्रीवास्तव सूरज लाल चंद्र नीरज श्रीवास्तव मोहित श्रीवास्तव कुलदीप श्रीवास्तव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।