टीबी मरीजों को स्वस्थ जीवन की राह दिखा रही हैं गुड़िया

भेदभाव और कलंक के खिलाफ मुखर होकर कर रही हैं युवती का सहयोग
गुड़िया की मदद से दो लड़कियां पहले भी हो चुकी हैं स्वस्थ

कबीर बस्ती न्यूज:

गोरखपुर। पिपरौली ब्लॉक के सरया गांव की रहने वाली गुड़िया (36) टीबी मरीजों के जीवन में आशा की किरण बिखेर रही हैं। सिलाई-कढ़ाई और सजावट का काम करने वाली गुड़िया यह सेवा स्वेच्छा से दे रही हैं । भेदभाव और कलंक के खिलाफ मुखर होकर युवती का सहयोग कर रही गुड़िया पहले भी दो बच्चियों की मदद कर चुकी हैं और उनकी मदद से पड़ोस की उन लड़कियों का टीबी ठीक हो गया।

गुड़िया के इस कार्य में उनके पति और बच्चे भी उनका साथ देते हैं । गांव की ही नीति (18) (बदला हुआ नाम) को जब टीबी हुआ तो उनके रिश्तेदार भी दूरी बनाने लगे । नीति बताती हैं कि गुड़िया चाची ने आगे बढ़ कर उनकी मदद की । उन्हें लेकर सदर अस्पताल गईं और निःशुल्क इलाज शुरू करवाया । वह उन्हें साफ-सफाई से रहने का तरीका बताती हैं और यह भी बताती हैं कि मास्क लगा कर रहना है। साथ में लेकर अस्पताल जाती हैं। पोषण के पैसे आने बंद हो गये तो गुड़िया ने टीबी आफिस जाकर उनकी मदद की ।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स (पीपीएम) अभय नारायण मिश्र ने बताया कि गुड़िया इससे पहले भी दो बच्चियों की मदद कर चुकी हैं । विभाग उन्हें ट्रिटमेंट सपोर्टर बनाने का प्रयास कर रहा है । उन्होंने यह काम स्वेच्छा से शुरू किया । वह सूर्यविहार कालोनी में किराये पर रहते हुए दो बच्चियों के टीबी के इलाज में मददगार बनीं । इस समय अपने गांव की ही बच्ची की मदद कर रही हैं ।

गुड़िया बताती हैं कि वह ज्यादा पढ़ी लिखी तो नहीं हैं लेकिन उन्हें यह काम सबाब का लगता है । उन्हें उर्दू की जानकारी है और वह कुरान पढ़ लेती हैं। उन्हें इतना पता है कि यह काम करने से आत्मसंतोष मिलता है । वह बताती हैं नीति को जानने वाले लोगों को जब पता चला कि उसे टीबी है तो नांक भौं सिकोड़ने लगे । उन्हें तभी इस बात की जानकारी हुई कि नीति को टीबी है। चूंकि वह सूर्यविहार में दो बच्चियों का इलाज करवा चुकी थीं इसलिए उन्हें पता था टीबी संक्रामक बीमारी अवश्य है लेकिन सावधानी के साथ टीबी मरीजों की मदद की जा सकती है । इसलिए उऩ्होंने नीति की मदद करनी शुरू की ।

नीति की मां ने बताया कि उनकी बेटी की काफी तबीयत खराब हो गई थी और गुड़िया ने मेडिकल कालेज से लेकर सदर अस्पताल तक उनकी बच्ची की मदद की । गुड़िया के परिवार में उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। दो बेटियों की शादी हो चुकी है । उनका परिवार उनका मनोबल बढ़ाता है । इस सवाल पर कि क्या टीबी मरीजों की मदद करने में गुड़िया को डर नहीं लगता है, गुड़िया का कहना है कि जिंदगी-मौत ऊपरवाले के हाथ में है । इंसान को इंसान की मदद करनी चाहिए । चिकित्सकों की सलाह के अनुसार वह टीबी मरीजों की मदद करते समय सतर्क रहती हैं ।

टीबी रोगियों की करें मदद

दो सप्ताह से अधिक की खांसी, रात में बुखार होना, सांस फूलना, बलगम में खून आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं । ऐसी स्थिति में टीबी की तुरंत जांच कराएं और सरकारी अस्पताल से निःशुल्क इलाज करवाएं । टीबी का पूरा इलाज संभव है, बशर्ते बीच में दवा न बंद की जाए । टीबी मरीजों के साथ भेदभाव नहीं करना है और उनकी मदद करनी है । हर जागरूक व्यक्ति को एक

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