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पत्रकारों के विरूद्ध मिसकंडेक्ट के बुने जाल में खुद ही फंस गए ससूनि तिवारी, डीएम ने बैठाई मजिस्ट्रेटी जांच

-पत्रकार स्थाई समिति की बैठक मे ही पत्रकारों पर ससूनि का धूल चटाने का प्रयास
– आरटीआई मे फर्जी निकली मिसकंडेक्ट की कार्यवाही                                                                                                           
-निष्पक्ष जांच हुई तो सहायक सूचना निदेशक पर गाज गिरनी तय
-शासनादेश के बिना ही पत्रकार को घोषित करा दिया था मिसकंडेक्ट
-डीएम प्रियंका निरंजन ने शुरू कराई प्रकरण की जांच
-एडीएम अभय कुमार मिश्रा ने तीन दिन में मांगा सहायक सूचना निदेशक से स्पष्टीकरण
कबीर बस्ती न्यूज:
बस्ती। जिले के सहायक सूचना निदेशक प्रभाकर तिवारी मिसकंडेक्ट के जाल में खुद ही फंस गए हैं, जानकर हैरानी होगी कि बिना शासनादेश के ही उन्होने पत्रकार को नियम विरूद्ध ढंग से मिसकंडेक्ट घोषित करा दिया था। इतना ही उन्होने प्रेस नोट जारी कर बकायदा अपने करतूत का ढिंढोरा प्रेसनोट जारी किया। इनके फर्जीवाड़े का खुलासा आरटीआई से हुआ। जिसमें उन्होने खुद ही स्वीकार किया है कि मिसकंडेक्ट संबंधी शासनादेश है ही नहीं।
जानिए यह है पूरा मामला
जिले के पॉलिटेक्निक में 27 फरवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा थी, कार्यक्रम कवरेज को लेकर सूचना कार्यालय की ओर से प्रेस पास जारी किया जा रहा था। सहायक सूचना निदेशक ने ज्यादातर पत्रकारों को प्रेस पास नहीं जारी किया। पत्रकार राज प्रकाश ने जब सहायक सूचना निदेशक से पूछा कि आप प्रेस पास क्यों नहीं दे रहे हैं, तो उन्होने कहा कि डिजिटल मीडिया व साप्ताहिक समाचार पत्रों को प्रेस पास नहीं जारी किया जाएगा। जब उन्होने कहा हम आपकी शिकायत करेंगे, तो सहायक सूचना निदेशक ने तंज भरे लहेजे में कहा कर दीजिए। जिसके बाद तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई गई, जिससे सहायक सूचना निदेशक खींझ गए।
पत्रकार को फंसाने के लिए बिछा डाला मिसकंडेक्ट का जाल
लगातार हो रही शिकायतों से खीझे सहायक सूचना निदेशक ने पत्रकार राज प्रकाश को फंसाने के लिए मिसकंडेक्ट का जाल बिछा डाला, दो मई को इन्होने पत्रकार स्थाई समिति का गठन किया, जिसमें नियम विरूद्ध ढंग से चार की जगह पांच पत्रकारों को समिति का सदस्य बनाया और आननफानन में चार मई को बैठक करा दी। बैठक का उद्देश्य था पत्रकार उत्पीड़न संबंधी मामलों पर चर्चा की जाए, लेकिन यहां तो उल्टा हो गया। पत्रकार को ही उत्पीड़ित करने की नियत से प्रेस नोट जारी करा दिया गया। बिना पत्रकार का पक्ष सुने, बिना उसे नोटिस दिए। प्रेस नोट में कहा गया कि बिना पंजीकृत न्यूज पोर्टल संचालित करने वाले राज प्रकाश का नाम मिसकंडेक्ट रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया। कुछ स्थानीय समाचार पत्रों में इन्होने इसकी खबर भी प्रकाशित करा दी।
आरटीआई से खुली सहायक सूचना निदेशक पोल
 जिले के सहायक सूचना निदेशक प्रभाकर तिवारी की पोल आरटीआई के जरिए खुली। सहायक सूचना निदेशक से सूचना मांगी गई।
पहला प्रश्न : मिसकंडेक्ट रजिस्टर किस शासनादेश के तहत बनाया गया, शासनादेश दें।
उत्तर मिला: रजिस्टर इस कार्यालय में अनुरक्षित नहीं है, मिसकंडेक्ट की कार्रवाई पत्रकार स्थाई समिति की बैठक में की गई है। बैठक की कार्यवाही की छाया प्रति संलग्न है। आपको बता दें कि जो छाया प्रति इन्होने दी है, उसमें तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।
दूसरा प्रश्न: मिसकंडेक्ट रजिस्टर किस शासनादेश के तहत बनाया गया है, शासनादेश दें।
उत्तर मिला: शासनादेश कार्यालय में अनुरक्षित नहीं है। आपको बता दें कि जब शासनादेश ही नहीं है तो मिसकंडेक्ट रजिस्टर कैसा बनाया गया।
तीना प्रश्न: पंजीकृत/अधिकृत पोर्टल का शासनादेश व समस्त नियमवली की प्रमाणित प्रति दें।
उत्तर मिला: शासनादेश कार्यालय कार्यालय में अनुरक्षित नहीं है। आपको बता दें कि जब शासनादेश अनुरक्षित नहीं है, तो किसी न्यूज पोर्टल को सहायक सूचना निदेशक कैसे अपंजीकृत व अवैध कह सकते हैं। इसी तरह से अन्य प्रश्नों का भी उत्तर उन्होने गोलमोल ढंग से दिया है।
निष्पक्ष जांच हुई तो सहायक सूचना निदेशक पर गाज गिरनी तय
आरटीआई के जरिए सहायक सूचना निदेशक की पोल खुलने के बाद पूरे मामले की शिकायत वर्तमान डीएम प्रियंका निरंजन से की गई, तो उन्होने ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच एडीएम अभय कुमर मिश्र को सौंप दिया। ऐसे में यह साफ हो गया है कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो सहायक सूचना निदेशक प्रभाकर तिवारी पर गाज गिरनी तय है। एडीएम ने तीन दिन के भीतर सहायक सूचना निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा है। सहायक सूचना निदेशक कार्यालय को 29 जून को स्पष्टीकरण के संबंध में पत्र भी प्राप्त हो गया है।