सीएमएस के सह पर एमबीबीएस एमडी पैथ डा0 पी.एल. गुप्ता महिला अस्पताल मे करते हैं नियमित ओपीडी
-डा0 पी.एल. गुप्ता अपने आवास पर भी करते हैं निजी प्रेक्टिस, योगी सरकार के जीरो टेलरेंष नीति की ऐसी की तैसी
-विशेष परिस्थितियों मे डा0 गुप्ता करते हैं ओपीडी, प्राईवेट प्रेक्टिस की हमें जानकारी नही- सीएमएस
-अस्पताल मे 9 महिला चिकित्सकों की है कमी पत्रकार पर ही दाग दिया सवाल भाई साहब 9 महिला चिकित्सकों की करा दीजिए तैनाती- सीएमएस
-एमबीबीएस एमडी पैथ चिकित्सक को नही गायनी के मामलों मे ओपीडी करने का अधिकार, जांच कराकर होगी कार्यवाही- सीएमओ डा0 राजीव निगम
कबीर बस्ती न्यूज
रिर्पोट- सरोज देवी
बस्ती। मण्डल मुख्यालय मे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का हालत् बद् से बदतर है। सैंया भये कोतवाल तो अब डर काहे का वाली कहावत यहां सटीक बैठ रहा है। योगी सरकार के जीरो टेलरेंष नीति की ऐसी की तैसी करते बेलगाम अधिकारी खुद ही षासनादेष को गढते और जबरिया लागू भी करते हैं। दुष्वारियां मरीज और उनके परिजन झेलने को मजबूर होते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं जिला महिला चिकित्सालय बस्ती का। जहां नाना प्रकार की अनियमितताएं, मनमानी के मामले चीख चीख का अपना दर्द बयां कर रहे हैं। इन सब मामलों को जानने के बाद भी जिला प्रषासन से लेकर अपर निदेषक स्वास्थ्य बस्ती मण्डल बस्ती तक कुछ कर पाने पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। जिला महिला चिकित्सालय बस्ती मे गत वर्षोंर्ं से तैनात एमबीबीएस एमडी पैथ डा0 पी.एल. गुप्ता का नियमित ओपीडी करना तथा गायनी के मामलों को देखना, जांच लिखना और बाहर की 2 से 5 हजार रूपये की दवा बाहर से लिखना यह डा0 पी.एल. गुप्ता का दिनचर्या बन चुका है। हो भी क्यों न जब विवादित सीएमएस डा0 अनिल यादव का हाथ डा0 पी.एल. गुप्ता पर हो। डा0 पी.एल. गुप्ता कुछ भी करें उनका सात खून माफ है। किसी भी अधिकारी क्या मजाल कि इनकी जांच करा ले। इतना ही नही डा0 पी.एल. गुप्ता महिला अस्पताल से महिला मरीजों को बरगला कर अपने आवास पर दिखाने के लिए प्रेरित करने से बाज नही आते। डा0 गुप्ता अपने आवास पर भी भव्य अस्पताल खोल रखा है जहां साहब नियमित महिला मरीजों को देखते हैं।
डा0 पी.एल. गुप्ता जहां अस्पताल मे पैथालजी विभाग को छोडकर गायनी का कार्य करते और नियमित ओपीडी करते हैं वहीं अपने आवास पर दिव्य और भव्य अस्पताल खोल रखा है जहां वह अपने द्वारा रेफर किये गये महिला मरीजों को देखते हैं और मनचाहा फीस वसूलते हैं। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि डा0 गुप्ता मरीजों को हजारों का अनावष्यक जांच और दो हजार से लेकर 5 हजार तक का दवा भी लिखने से नही चूकते। इन सब तिकडम से प्रतिदिन डा0 साहब की हजारों की कमाई हो जाती है। यह तो स्पष्ट है इस गोरखधंधे मे विवादित सीएमएस डा0 अनिल यादव का हाथ होने से इंकार नही किया जा सकता। जहां एक तरफ योगी सरकार ने चिकित्सकों के प्राईवेट प्रेक्टिस पर पूरी तरीके से रोक लगाने का दावा कर रही है वहीं डा0 गुप्ता जैसे चिकित्सक एमबीबीएस एमडी पैथ होकर भी गायनी के मामले मे निजी प्रेक्टिस करने मे मषगूल हैं।
सीएमएस डा0 अनिल यादव का कहना है कि अस्पताल के प्रत्येक चिकित्सकों से प्राईवेट प्रेक्टिस न करने का शपथ पत्र लिया जा चुका है यदि डा0 पी.एल. गुप्ता प्राईवेट प्रेक्टिस करते हैं अथवा इसकी षिकायत मिलती है तो इनके खिलाफ उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जायेगा और डा0 पी.एल. गुप्ता द्वारा नियमित ओपीडी करने के सवाल पर डा0 यादव कहते हैं कि डा0 गुप्ता द्वारा विशेष परिस्थितियों मे ओपीडी किया जाता है। उन्होने कहा कि महिला अस्पताल मे 9 महिला ख्कित्सकों की कमी है। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार से ही सवाल दाग दिया कि आप पत्रकार हैं तो 9 महिला चिकित्सकों की तैनाती यहां करा दीजिए। यहां यह बताना जरूरी है कि सीएमएस डा0 अनिल यादव का अनाप शनाप बयानों और गंभीर मामलों मे अखबारों की सुर्खियां भी बन चुके हैं।
इस सम्बन्ध मे मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 राजीव निगम ने कहा कि एमबीबीएस एमडी पैथ होकर गायनी सम्बन्धी मामले मे ओपीडी नही कर सकता। सामान्य रोगों मे वह इलाज करन का अधिकार रखता है। एमबीबीएस एमडी पैथ डा0 पीएल गुप्ता द्वारा ओपीडी तथा निजी प्रेक्टिस किया जा रहा है तो वह शासनादेशों के विरूद्व है। प्रकरण गंभीर है इसकी जांच कराकर सम्बन्धित चिकित्सक के विरूद्व कार्यवाही की जायेगी। सीएमओ के उपरोक्त कथन का जे.डी. हेल्थ बस्ती मण्डल बस्ती डा0 नीरज कुमार पाण्डेय ने समर्थन करते हुए जांच कराकर कार्यवाही करने की बात कही।
यहां सबसे बडा सवाल तो यह है कि ऐसे चिकित्सकों के नाजायज गतिविधियों जो आये दिन खबरों की सुर्खियां बनती हैं उन पर कार्यवाही क्यों नही हो पाती ? पारदर्षी तथा गुण्वत्तापरक स्वास्थ्य सेवाओं को घ्वस्त कर खाड कमाड चिकित्सकों के हाथ मे व्यवस्थाओं को सौंप देना कितना सही है। बहरहाल ऐसे चिकित्सक तो कुछ ही दिनों मे मालामाल हो जाते हैं लेकिन आर्थिक, मानसिक रूप शोषण तो मरीजों और उनके परिजनों का ही होता है। जो हजारों रूप्ये की जांच और 5 से 6 हजार रूप्यों की दवा जिसमे भारी भरकम चिकित्सक का कमीषन शामिल होता है का दंष झेलने को मजबूर होते हैं।
