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जयन्ती पर याद किये गये छत्रपति साहू जी महाराज

छत्रपति साहू जी ने सामाजिक हितों के लिये आजीवन संघर्ष किया -डा. वी.के. वर्मा

कबीर बस्ती न्यूज, बस्ती ।

प्रजातंत्र की मूल भावना की स्थापना के लिये आजीवन संघर्ष करने वाले छत्रपति साहू जी महाराज को उनकी 147 वीं जयन्ती पर याद किया गया। सरदार पटेल स्मारक संस्थान की ओर से शनिवार को सादगी और शारीरिक दूरी बनाते हुये लोगों ने संस्थान के छत्रपति साहू जी महाराज सभागार में उनकी प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर योगदान पर विमर्श किया गया।
संस्थान के महासचिव एवं भारतीय कूर्मी  महासभा जिलाध्यक्ष डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि  छत्रपति साहू महाराज ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने राजा होते हुए भी दलित और शोषित वर्ग के कष्ट को समझा और सदा उनसे निकटता बनाए रखी। उन्होंने दलित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। गरीब छात्रों के छात्रावास स्थापित किये और बाहरी छात्रों को शरण प्रदान करने के आदेश दिए। साहू महाराज के शासन के दौरान ‘बाल विवाह’ पर ईमानदारी से प्रतिबंधित लगाया गया। उन्होंने अंतरजातीय विवाह और विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में समर्थन की आवाज उठाई थी। इन   गतिविधियों के लिए महाराज साहू को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। साहू महाराज ज्योतिबा फुले से प्रभावित थे और लंबे समय तक ‘सत्य शोधक समाज’, फुले द्वारा गठित संस्था के संरक्षण भी रहे। ऐसे महापुरूषों से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
संक्षिप्त कार्यक्रम में शीतला पटेल, आर.के. सिंह पटेल, ओम प्रकाश चौधरी,  प्रेमचन्द्र  चौधरी पोरस,  ने कहा कि छत्रपति साहू महाराज ने दलित और पिछड़ी जाति के लोगों के लिए विद्यालय खोले और छात्रावास बनवाए। इससे उनमें शिक्षा का प्रचार हुआ और सामाजिक स्थिति बदलने लगी। परन्तु उच्च वर्ग के लोगों ने इसका विरोध किया। वे छत्रपति साहू महाराज को अपना शत्रु समझने लगे। उनके पुरोहित तक ने यह कह दिया कि- ‘आप शूद्र हैं और शूद्र को वेद के मंत्र सुनने का अधिकार नहीं है। छत्रपति साहू महाराज ने इस सारे विरोध का डट कर सामना किया।  जयन्ती अवसर पर कृष्ण चंद्र चौधरी, भानु प्रताप चौधरी, किशु पटेल, इंद्रमणि पटेल,संजय पटेल निखिल चौधरी, हरिनाम आदि शामिल रहे।

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