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स्थायी लोक अदालत के गठन क्षेत्राधिकार तथा कार्य शैली का विस्तृत प्राविधान

कबीर बस्ती न्यूज,सिद्धार्थनगर।उ0प्र0।

जिलाधिकारी  दीपक मीणा ने विज्ञप्ति के माध्यम से बताया है कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा स्थायी लोक अदालत संसद द्वारा विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 में वर्ष 2002 के संशोधन द्वारा अध्याय टप्। धारा 22। से 22म् जोड़ा गया है जिसमें स्थायी लोक अदालत के गठन क्षेत्राधिकार तथा कार्य शैली का विस्तृत प्राविधान दिया गया है। केवल जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित दीवानी प्रकृति के वाद एवं सुलह योग्य फौजदारी प्रकृति के वाद ही विचारार्थ स्वीकार किए जाएंगे।

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22 ।;इद्धमें दी गई सूची के अनुसार निम्नलिखित सेवाओं एवं संस्थानों से संबंधित प्रकरण स्थायी लोक अदालत में आते हैं जो निम्नलिखित हैं सवारी एवं मालभाड़ा से संबंधित वायुयान, सड़क एवं रेल मार्ग से संबंधित यातायात सेवाएं, पोस्टल, टेलीग्राफ एवं टेलीफोन सेवाएं, जनता को विद्युत, प्रकाश एवं जल उपलब्ध कराने वाले संस्थान, जन संरक्षण एवं साफ सफाई व्यवस्था व सेवायें, चिकित्सालय एवं डिस्पेंसरी सेवायें, बीमा सेवाएं, शिक्षा एवं शिक्षण सेवायें एवं आवास एवं भू संपदा सेवाएं। केवल एक करोड़ रुपये मालीयत तक के विवाद स्थायी लोक अदालत के समक्ष लाए जा सकते हैं। स्थायी लोक अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन/शिकायत पर कोई न्याय शुल्क या जुडिशियल टिकट देय नहीं है। स्थायी लोक अदालत में विवाद का समाधान/निस्तारण निःशुल्क होगा। स्थायी लोक अदालत का न्यायालय व कार्यालय प्रत्येक जिले के दीवानी न्यायालय परिसर के ए0डी0आर0 भवन में स्थित एवं कार्यरत है। धारा 22 ब्;1द्ध के प्राविधानानुसार किसी भी न्यायालय या प्राधिकरण में विचाराधीन विवाद स्थायी लोक अदालत में पोषणीय नहीं है। स्थायी लोक अदालत में विवाद प्री-लिटिगेशन स्तर पर ही लाए जा सकते हैं ताकि उनका निवारण किसी सक्षम न्यायालय में विवाद जाने से पूर्व ही किया जा सके। स्थायी लोक अदालत के एवार्ड/निर्णय के विरुद्ध कोई अपील किसी भी न्यायालय में नहीं की जा सकती है केवल एवार्ड/निर्णय के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226/227 के अंतर्गत रिट याचिका दाखिल की जा सकती है। अधिनियम 1987 की धारा 22म् ;5द्ध के अंतर्गत स्थायी लोक अदालत के एवार्ड/निर्णय को स्थानीय सिविल जज के न्यायालय में निष्पादन के लिए भेज दिया जाएगा जिसका निष्पादन दीवानी न्यायालय के निर्णय के निष्पादन की भांति एवार्ड/निर्णय का निष्पादन उक्त सिविल जज के न्यायालय द्वारा कराया जाएगा। स्थायी लोक अदालत शिकायत/याचिका का निस्तारण 60 दिन में करेगी। अधिनियम की धारा 22म्;2द्ध के प्राविधानानुसार स्थायी लोक अदालत के एवार्ड/निर्णय की मान्यता किसी दीवानी न्यायालय द्वारा पारित डिग्री की भांति है। अधिनियम 1987 की धारा 22 ब्;2) के प्राविधानानुसार स्थायी लोक अदालत में प्रकरण दाखिल करने के बाद आवेदक/शिकायतकर्ता किसी अन्य न्यायालय या प्राधिकरण में प्रकरण को नहीं ले जा सकेगा।

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