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फाइलेरिया प्रभावित अंगों की सही देखभाल करें और राहत पाएँ : डीएमओ

फाइलेरिया मरीजों को मिली एमएमडीपी किट,उपयोग का तरीका भी बताया
नियमित व्यायाम से भी मिल सकता है आराम, साल में एक बार दवा जरूर खाएं
प्रत्येक गुरुवार को प्राप्त की जा सकती है दवा और एमएमडीपी किट

कबीर बस्ती न्यूज:
गोरखपुर। फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है, जिसे हाथीपाँव भी कहा जाता है। इसका कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन सही देखभाल से राहत जरूर मिल सकती है। हाथीपांव से प्रभावित अंग की नियमित साफ – सफाई करनी चाहिए और व्यायाम  करना चाहिए । इसके साथ ही साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन भी करना चाहिए। यह बातें जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ)अंगद सिंह ने कहीं । उन्होंने फाइलेरिया यूनिट पर मरीजों को रुग्णता प्रबन्धन एवं दिव्यांगता निवारण (एमएमडीपी) किट प्रदान किया । इसके साथ ही किट के उपयोग के बारे में प्रशिक्षण भी प्रदान किया  । महानगर के असुरन चौक के निकट स्थित फाइलेरिया यूनिट से प्रत्येक गुरुवार को दवा और एमएमडीपी किट प्राप्त की जा सकती है |
जिला मलेरिया अधिकारी ने कहा कि गुरुवार को हाथीपांव के 13 मरीजों को एमएमडीपी किट प्रदान की गयी, जिसमें बाल्टी, मग, तौलिया, टब, साबुन और क्रीम शामिल हैं । मरीजों को बताया गया कि हाथीपांव के मरीज को टब में अपना प्रभावित अंग रखना होता है और फिर मग से धीरे धीरे पानी डालकर अंग को भिगोना होता है। पानी न तो ठंडा हो और न ही गरम हो। साबुन को प्रभावित अंग पर सीधे नहीं लगाना है । साबुन को हाथों में लेकर झाग बना लेना है और फिर उसी झाग को प्रभावित अंग पर लगाना है और अंग को धुलना है । इसके बाद साफ कॉटन के तौलिये से बिना रगड़े हल्के हाथ से अंग को साफ करना है। अगर प्रभावित अंग कहीं कटा है या इंफेक्टेड है तो वहां पर क्रीम भी लगाना है। प्रतिदिन ऐसा करने से हाथीपांव से प्रभावित अंग सुरक्षित रहते हैं और आराम भीमिलता है । इसके अलावा एड़ियों के सहारे खड़ा होकर प्रतिदिन व्यायाम करना है।
खोराबार ब्लॉक के सनहा  निवासी रामवृक्ष (65) ने बताया कि उन्हें एमएमडीपी किट देकर साफ सफाई के बारे में बताया गया। उनका दाहिना पैर  पिछले दो साल से फाइलेरिया से प्रभावित है। वह पहले से ही प्रभावित अंग की साफ सफाई करते हैं और इससे काफी आराम मिलता है। वह पेशे से राजगीर हैं। जब हाथीपांव हुआ तो शुरू में काफी दिक्कत हुई लेकिन उन्हें दवा, व्यायाम और साफ सफाई से काफी आराम मिला है ।किट मिलने के बाद भी कार्य जारी रखेंगे । प्रशिक्षण में पैर की साफ-सफाई के बारे में विस्तार से जानकारी मिली ।
इस मौके पर सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे ने कहा कि फाइलेरिया क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होता है । संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो स्वस्थ व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है लेकिन संक्रमण का लक्षण आने में पांच से 15 साल तक का समय लग सकता है । इसके संक्रमण से अगर हाथीपांव हो जाए तो जीवन बोझ बन जाता है। मच्छरों से बचाव और साल में एक बार पांच साल तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानिएमडीए राउंड के दौरान दवा के सेवन से इससे बचा जा सकता है। दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी से ग्रसित को छोड़कर सभी को इस दवा का सेवन करना है। कार्यक्रम में फाइलेरिया निरीक्षक और लैब टेक्निशियन भी मौजूद रहे।