कोविड कॉल मे अभिभावकों से जबरिया फीस वसूली करने वाले दो भाजपा नेता कर रहे हैं विकास की गंगा बहाने का दावा

भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल ने भी दानों नेताओं से किया था बच्चों की फीस माफ करने की मार्मिक अपील

दिनेश मिश्र

बस्ती। जरजराते हुए कोविड कॉल यानि वर्ष 2020 मे अपने सत्ता के हनक का प्रयोग करते हुए जिले के दो कद्दावर भाजपा नेताओं ने भूख व बेबसी से बिलबिला रहे अभिभावकों का खून चूसने मे कोई कोर कसर नही छोडा। यहां तक कि स्कूल की फीस वसूली को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन पर दबाव बनाया गया। हलांकि दोनों भाजपा नेता अपने मिशन मे कामयाब भी रहे। अब वे नगर निकाय चुनाव मे अध्यक्ष पद के लिए बस्ती शहर व गनेशपुर नगर पंचायत मे विकास का सूनामी बहाने का दावा ठोंक रहे है। जो कि जनता के गले के नीचे नही उतर रही है।

इन दोनों भाजपा के लाल मे बस्ती सदर के पूर्व भाजपा विधायक व श्रीराम पब्लिक स्कूल के संस्थापक दयाराम चौधरी तथा भाजपा नेता व सीएमएस स्कूल के प्रबन्धक अनूप खरे के कृत्यों की चर्चा चहुंओर है। इन दोनों नेताओं ने स्कूलों की फीस वसूली को लेकर बाकायदे लेटर पैड पर तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन को सौंप पुलिस के माध्यम से फीस वसूली की मांग किया था। जिसका खूबसूरत फोटो आज भी सोशल मीडिया के विभिन्न  प्लेटफार्माें पर मौजूद है।

नगर निकाय चुनाव मे बस्ती नगर पालिका परिषद पद हेतु भाजपा नेता व सीएमएस स्कूल के प्रबन्धक अनूप खरे की पत्नी सीमा खरे भाजपा के टिकट पर शहर मे विकास की गंगा बहाने का दावा ठोंक रही हैं तो वहीं बस्ती सदर के पूर्व भाजपा विधायक व श्रीराम पब्लिक स्कूल के संस्थापक दयाराम चौधरी की पत्नी शहर से सटे गनेशपुर नगर पंचायत मे अध्यक्ष पद पर भाजपा के टिकट पर ऐतिहासिक विकास कराने का वादा जनता से कर रही है।

उल्लेखनीय है कि 29 जून 2020 को तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन को सीबीएसई मैनेजर्स एसोसिएशन ने सदर विधायक दयाराम चौधरी के नेतृत्व में ज्ञापन दिया था । एसोसिएशन पदाधिकारी और सदस्यों ने कहा था कि अभिभावक लॉकडाउन अवधि की फीस जमा नहीं कर रहे हैं। इससे विद्यालयों के सामने आर्थिक संकट आ गया है।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने डीएम को अवगत कराया कि लॉकडाउन अवधि में भी विद्यालय लगातार ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर रहे हैं, लेकिन अभिभावकों के फीस जमा न करने से शिक्षकों को वेतन देने में समस्या आ रही हैं। एसोसिएशन संरक्षक अशोक शुक्ल व अरविंद पाल ने बताया कि ऐसे अभिभावक जो सरकारी कर्मचारी हैं, वे भी फीस जमा नहीं करना चाह रहे हैं। सोशल मीडिया पर फीस माफी का भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। सूबे के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ऐसे लोगों पर कार्रवाई की बात भी कह चुके हैं। जिलाध्यक्ष जेपी त्रिपाठी व मंत्री अनूप खरे ने डीएम से फीस जमा करने की एडवाइजरी जारी करने का निवेदन किया था। डीएम को ज्ञापन देते हुए का फोटो भी सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। अब देखना यह है कि जनता इन्हें क्या सबक सिखाती है।

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