मै निठल्ला नही हूं…………मेरे पास बहुत काम है: एसीएमओ डा0 ए.के. मिश्रा

एसीएमओ की बदजुबानी से खुला उनके कार्य संस्कृति एवं योग्यता का राज, आम जनता के साथ कैसा होता होगा व्यवहार

ऐसे शब्दों का नही होना चाहिए प्रयोग- सीएमओ

कबीर बस्ती न्यूज।

बस्ती। मै निठल्ला नही हूं…………मेरे पास बहुत काम है। मै जिले मे चल रहे नाजायज अल्टरासाउंड सेन्टरों एवं नर्सिंगहोमों पर कार्रवाई नही कर सकता। मै ही अकेला एसीएमओ हूं…..क्या क्या करूं …. आपको मेरे खिलाफ जो लिखना हो लिखिए हमे कोई फर्क नही पडता…..आप सरकार के खिलाफ भी लिखिए …. यह कहना है स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डा0 ए.के. मिश्रा का। जिनके बदजुबानी ने उनके योग्यता का प्रमाण दे डाला। जब इस प्रकार की बदजुबानी वे प्रेस से कर सकते हैं तो आम जनता के प्रति उनका रवैया कैसा होगा। प्रकरण जिले के रूधौली कस्बे से सम्बन्धित था। जहां इन्ही विभागीय आकाओं के रहमो करम पर तीन नाजायज अल्टरासाउंड सेन्टर जे.पी. डायग्नोस्टिक सेन्टर, आइडियल डायग्नोस्टिक सेन्टर तथा रूधौली मार्ग पर स्थित ग्लोबल हास्पिटल यहां भी विभागीय संरक्षण मे अल्टरासाउंड अप्रशिक्षितों द्वारा किया जाता है।

बताते चलें कि जिले के रूधौली कस्बा क्षेत्र मे अनेकों अल्टरासाउंड सेन्टर व नर्सिंगहोम संचालित हैं। जिन पर विभाग की नजर कभी नही पडती। रूधौली सीएचसी के पास नाजायज तरीके से संचालित जे.पी. डायग्नोस्टिक सेन्टर, आईडियल डायग्नोस्टिक सेन्टर, भानपुर रोड पर संचालित ग्लोबल हास्पिटल जिसमें बिना चिकित्सक के अल्टरासाउंड भी होता है। विभागीय जिम्मेदारों के रहमोकरम पर संचालित हो रहा है। जहां एक तरफ योगी सरकार जनता के स्वस्थ्य स्वास्थ्य की कामना को लेकर मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पहुचाने का प्रयास कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के निगहबान ही मरीजों के जान पर संकट पैदा कर रहे हैं। इन अल्टरासाउंड सेन्टरों का न तो लाइसेन्स है और न ही किसी योग्य चिकित्सक द्वारा ही अल्टरासाउंड किया जाता है। इन अल्टरासाउंड सेन्टरों पर अप्रषिक्षित लोग अल्टरासाउंड कर नाजायज तरीके से धन उगाही करते है। उन्हें मरीजों के स्वास्थ्य स्वास्थ्य से कोई लेना देना नही है। क्योंकि डाक्टर को बधां बधाया कमीषन भी देना है। हैरत की बात तो यह है कि सरकारी अस्पताल के डाक्टरों द्वारा अल्टरासाउंड के लिए मरीजों को मनपसन्द सेन्टरों पर भेजा जाता है। लेकिन अल्टरासाउंड सेन्टरों के रिर्पोट पर किसी डाक्टर का हस्ताक्षर नही होता है और रिर्पोट देखकर मरीजों को दवा लिख दिया जाता है। मरीज चाहे जिए या मर जाय। उनसे कोई मतलब नही होता। उन्हें तो केवल कमीषन से मतलब होता है। उपरोक्त नाजायज अल्टरासाउंड सेन्टर चलाने वाले कोई मामूली आदमी नही है वे सभी किसी न किसी पार्टी का मुखौटा लगा कर निरीह मरीजों का दोहन करते और उनके जीवन के साथ खिलवाड करते हैं।

इस सम्बन्ध मे सीएमओ डा0 आर.पी. मिश्र ने पूछने पर कहा कि एसीएमओ को ऐसे शब्दों का प्रयोग कदापि नही करना चाहिए इससे विभाग की छबि धूमिल होती है फिर भी मै इस मामले को देखता हूं।

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