कुपोषण और एनीमिया से बचाव के लिए कृमि मुक्ति की दवा का सेवन अनिवार्य-सीएमओ

एक फरवरी को पूरे जिले में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

एक वर्ष से अधिक उम्र के स्कूली बच्चों और किशोर किशोरियों को खिलाई जाएगी पेट से कीड़े निकालने की दवा

कबीर बस्ती न्यूज।

गोरखपुर: मनुष्य की आंत में रहने वाले कृमि, बच्चों और किशोर किशोरियों में कुपोषण के साथ साथ एनीमिया का भी कारक बनते हैं । इससे बचाव के लिए कृमि मुक्ति की दवा का सेवन अनिवार्य है । इसी उद्देश्य से एक फरवरी को पूरे जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा । यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने दी । उन्होंने बताया कि एक वर्ष से अधिक उम्र के सभी स्कूली बच्चों और किशोर किशोरियों को अपने शिक्षक या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सामने इस दवा का सेवन करना अनिवार्य है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि मनुष्य की आंत में रहने के दौरान जीवित रहने के लिए कृमि मनुष्य के शरीर से ही पोषक तत्व खाते हैं। इसका सबसे बुरा असर एक से 19 वर्ष की आयु वर्ग में पड़ता है और कई प्रकार के लक्षण दिखने लगते हैं । गंभीर कृमि संक्रमण की स्थिति में दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी, भूख न लगना, सीखने की क्षमता में कमी, एनीमिया और कुपोषण के लक्षण दिखते हैं। अगर वर्ष में सिर्फ दो बार पेट से कीड़े निकालने की दवा का सेवन किया जाए तो इनसे बचाव हो सकता है । इसी उद्देश्य से पहली फरवरी को सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर दवा खिलाने की योजना है ।
डॉ दूबे ने बताया कि दवा के सेवन से स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार के साथ साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी बढ़ोत्तरी होगी। समुदाय में कृमि संक्रमण की व्यापकता में कमी लाने में इस कार्यक्रम का अहम योगदान है। कृमि से बचाव की दवा बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए सुरक्षित है। एक से तीन साल तक के बच्चों को निर्धारित मात्रा में गोलियों का चूरा बना कर खिलाया जाता है, जबकि इससे अधिक आयु के लोगों को उम्र के अनुसार निर्धारित मात्रा में गोली चबा कर खानी है । खाली पेट दवा का सेवन नहीं करना है । कुछ बच्चों में दवा के सेवन के बाद उल्टी, मिचली और चक्कर आने जैसे सामान्य लक्षण दिखते हैं जिनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है । यह सामान्यतया अपने आप ठीक हो जाते हैं ।
92 फीसदी ने खाई थी दवा
सीएमओ ने बताया कि अभियान का संचालन अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एके चौधरी, डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय और आरबीएसके योजना की डीईआईसी मैनेजर डॉ अर्चना की देखरेख में होगा। पिछले साल फरवरी में चले अभियान के दौरान गोरखपुर में 92 फीसदी बच्चों और किशोर किशोरियों ने इस दवा का सेवन किया था। इस बार 23.23 लाख को दवा खिलाने का लक्ष्य है । यह दवा 2814 सरकारी स्कूल, 2187 प्राइवेट स्कूल और 4186 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से खिलाई जाएगी ।
सामने खिलाते हैं दवा
शिवपुर सहबाजगंज क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रागिनी ने बताया कि अभियान के दौरान सभी बच्चों को अपने सामने दवा खिलाते हैं। यह दवा पूरी तरह से सुरक्षित है । गर्भवती को भी गर्भावस्था के दूसरे या तीसरे तिमाही में कृमि से बचाव की एक गोली दी जाती है । उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देशन में इस बार भी दवा का सेवन कराया जाएगा ।

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