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लॉकडाउन में गरीबों और जरूरतमंदों की मददगार अन्नपूर्णा रसोई ने पूरे किए दो वर्ष

– अन्नपूर्णा रसोई की शुरुआत 18 अप्रैल 2019 को पुरानी बस्ती क्षेत्र के करुआ बाबा चौक स्थित हनुमान मंदिर से हुआ था सेवा का शुरूआत्

बस्ती । पिछले वर्ष लॉकडाउन में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद हेतु जिले में तमाम लोग संकटमोचन बनकर काम किये लेकिन बस्ती जिले में अन्नपूर्णा रसोई का जो काम रहा वह निश्चित ही सराहनीय रहा । कहते हैं कि किसी भूखे को भोजन देना जीवन का सबसे बड़ा दान है क्योंकि अन्न ही जीवन संचालित करता है। असहाय, वृद्धों व जरूरतमंदों के भूख की पीड़ा को देखते हुए 2 वर्ष पूर्व कुछ उत्साही लोगों द्वारा सामाजिक सहयोग से संचालित की गई अन्नपूर्णा रसोई रसोई की शुरुआत 18 अप्रैल 2019 को पुरानी बस्ती क्षेत्र के करुआ बाबा चौक स्थित हनुमान मंदिर पर की गई थी तब से लेकर आज तक मां अन्नपूर्णा की कृपा से यह रसोई सामाजिक सहयोग से चल रही है । रविवार 18 अप्रैल 2021 को अन्नपूर्णा रसोई के 2 वर्ष पूर्ण होने पर अन्नपूर्णा रसोई परिवार ने सभी दानदाताओं, सेवादारों को शुभकामनाएं देते हुए धन्यवाद भी दिया है। अन्नपूर्णा रसोई के संचालन राघवेंद्र मिश्र ने बताया कि पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान हमारी टीम ने बहुत मेहनत की । बाहर से आने वाले राहगीरों को तथा शहर में लॉकडाउन के दौरान भूखे रह रहे गरीबों को, मजदूरों को हमने लंच पैकेट उपलब्ध कराया। इसमें हमारी पूरी टीम ने तन, मन, धन से हमारा सहयोग किया हम उन सभी लोगों का धन्यवाद देते हैं। उन्होंने बताया कि आगे भी हमारा यह प्रयास जारी रहेगा। श्री मिश्र ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान भूखे लोगों का पेट भरने के लिए रसोई से हजारों की संख्या में खाने के पैकटों का विभिन्न क्षेत्रों में वितरण किया गया। आज भी सामाजिक सहभागिता के जरिए चल रही यह रसोई जरूरतमंदों और श्रमिकों के परिजनों का पेट भरनेे का मुख्य माध्यम बन रही हैं । वर्तमान समय में रसोई में रोजाना जरूरतमंदों को भोजन कराया जा रहा है। भोजन बनाने के साथ वितरण के वक्त कोरोना प्रोटोकॉल के साथ ही सैनेटेशन का भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। मास्क व ग्लब्स पहनकर ही काम व खाने का वितरण किया जा रहा है। बातचीत के दौरान राघवेंद्र मिश्र ने बताया कि सामाजिक सहभागिता से संचालित रसोई में रोजाना सैकड़ों लोगों को भोजन कराया जा रहा है जो आगे भी निरंतर चलता रहेगा।

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