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मांगो को लेकर संविदा आयुष चिकित्सकों का आन्दोलन तीसरे दिन भी जारी

काली पट्टी बांध कर रहे कार्य, वेतन विसंगति दूर करने की मांग

बस्ती। मेन स्ट्रीम आयुष डाक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर 7 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत सभी संविदा आयुष चिकित्सकों का आन्दोलन तीसरे दिन बुधवार  को भी जारी रहा। संविदा आयुष चिकित्सकों ने जिला मुख्यालय सहित सीएचसी एवं पी.एच.सी पर हाथों में काली पट्टी बांधकर कार्य किया।
एसोसिएशन जिलाध्यक्ष   डा. वी.के. वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर 7 सूत्रीय मांग पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य चिकित्साधिकारी बस्ती को भेजा गया था किन्तु मांगों पर अभी तक कोई विचार न किये जाने से रोष है। संविदा आयुष चिकितकों को बहुत कम मानदेय दिया जाता है जबकि उनसे  सर्वाधिक कार्य लिया जाता है। आयुष चिकित्सकांें का मानदेय जहां वर्तमान में लगभग 40 हजार रूपया है वहीं एलोपैथिक चिकित्सकों का मानदेय 70 हजार प्रति माह है। राज्य सरकार के अधीन कार्य कर रहे एमओसीएच आयुष चिकित्सकों का मानदेय भी 60 हजार है जबकि एनएचएम आयुष चिकित्सकों को पद के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है। यह असमानता दूर होनी चाहिये।
डा. वर्मा ने बताया कि मुख्य मांगांे में प्राथमिकता के स्तर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत सभी संविदा आयुष चिकित्सकों को 25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि, 50 लाख का कोविड बीमा समय से दिलाये जाने,   वेतन विसंगति दूर कर समायोजन कराया जाना शामिल है।
डा. वी.के. वर्मा ने बताया कि महामारी में फ्रंट लाइन कोरोना वारियर के रूप में स्क्रीनिंग, सेम्पलिंग, मरीजों को होम आइसोलेशन में मेडिकल किट देने, मरीजों का हाल चाल लेने, रैपिड रिस्पांस टीम, कांटेक्ट टेªसिंग, कोविड कन्ट्रोल रूम आदि में आयुष चिकित्सक पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों को पूरा कर रहे हैं। अनेक आयुष चिकित्सकों ने अपने प्राणों की आहुति दिया, कुछ कोरोना संक्रमित हैं और कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। इसके बावजूद न तो वेतन विंसंगति दूर हो रही है और न ही आयुष चिकित्सकों को 25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि एवं कोविड बीमा की सुविधा उपलब्ध कराया गया है।
बताया कि  समस्त संविदा आयुष चिकित्सकों को सरकार द्वारा दिया जाने वाला 25 प्रतिशत राशि का लाभ देने के साथ ही 50 लाख का कोविड बीमा राशि दिलाया जाय, आयुष चिकित्सकोें एवं उनके परिवार को निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा देने के साथ ही  वेतन विसंगतियोें को दूर कर सेवा निवृत्ति की पुरानी 70 वर्ष की आयु सीमा बहाल करते हुये ट्रांसफर नीति शुरू किया जाय और कोविड में मृत लोगों के परिजनों को मृतक आश्रित नौकरी उपलब्ध कराया जाय। जब तक मांगे नहीं मानी जाती चरणबद्ध ढंग से विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
काली पट्टी बांधकर कार्य करने वालों में मुख्य रूप से डा. प्रदीप शुक्ल, डा. अनिल मिश्र, डा. राम प्रकाश, डा. वंदना तिवारी, डा. सुनील सौरभ, डा. दिनेश सिंह कुश्वाहा, डा. श्रद्धा सिंह, डा. साजिया खान, डा. भावना गुप्ता आदि शामिल रहे।

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