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देश में एक और संपूर्ण क्रांति की जरूरत – प्रो चितरंजन मिश्रा

जयन्ती पर याद किये गये जे.पी. बाबू, संगोष्ठी में व्यापक विमर्श

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

वर्तमान में देश में जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं उसमें एक बार पुण संपूर्ण क्रांति के अग्रदूत लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाए गए आंदोलन को सभी वर्गों द्वारा मिलजुल कर पुनः चलाए जाने की आवश्यकता है। सत्ता एवं पूंजीवाद तथा गुंडागर्दी के गठजोड़ से जिस तरह का वातावरण पैदा हो रहा है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। इसमें जुवा वर्ग के अलावा समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। यह उद्गार लोकनायक जयप्रकाश की जयंती के अवसर पर लोकतंत्र सेनानी सेवा संस्थान द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं एवं पूर्व प्रति कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा एवं साहित्य अकादमी नई दिल्ली के हिंदी संयोजक प्रोफेसर चितरंजन मिश्र ने व्यक्त किए। प्रोफेसर ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति के अग्रदूत थे उन्होंने अहिंसक आंदोलन को इतना व्यापक स्वरूप दिया जिससे सत्ता में बैठी कांग्रेस पार्टी कि चूले हिल गई। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी जैसी तानाशाही प्रवृत्ति प्रधानमंत्री को भी जयप्रकाश नारायण जी के संपूर्ण क्रांति के आव्हान के आगे घुटने टेकने पड़े। प्रोफेसर मिश्र ने इतिहास के कई महत्वपूर्ण प्रकरणों का उल्लेख करते हुए कहा के क्रांति के लिए सिर्फ इंसा ही जरूरी नहीं है बल्कि वैचारिक स्तर पर समाज को बदल कर सत्ता परिवर्तन किया जा सकता है। उनका आंदोलन सत्ता प्राप्त के लिए नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के लिए चलाया गया था यही कारण है कि दमन के लिए सरकार द्वारा चलाए गए समस्त को चक्कर उक्त आंदोलन के सामने भोथरे साबित हुए। प्रोफेसर मिश्र ने कहा कि कैई ऐसे अवसर आए जब महसूस होने लगा कि लोकनायक जयप्रकाश ने आंदोलन से खुद को जुदा कर लिया है किंतु देश की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्होंने फिर से आंदोलन से जोड़ने का निर्णय लिया। उनकी अगुवाई में प्रेरित होकर देश का युवा वर्ग इस आंदोलन में कूद पड़ा और सत्ता एवं प्रशासन को भी असहाय होना पड़ा । अंत में विवश होकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी नहीं देश में आपातकाल घोषित कर दिया और विरोधियों को जेल के सीखचों में कैद कर दिया। लगभग 2 साल तक चले दमन चक्र के बावजूद क्रांतिकारियों का हौसला नहीं टूटा और परिणाम स्वरूप अगले चुनाव में कांग्रेस पार्टी का पूरे देश से पूरी तरह सफाया हो गया। उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन सिद्धांतों पर आधारित था कहीं भी तानाशाही और हिंसा को जगह नहीं दी गई थी यही कारण है कि संपूर्ण जनमानस में इस आंदोलन के लिए स्वीकारता थी। प्रोफेसर मैसेज में लोकनायक जयप्रकाश केअस्वस्थ होने पर इंदिरा गांधी द्वारा मुलाकात किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि देश विषम परिस्थिति में गुजर रहा था ऐसी स्थित में संपूर्ण क्रांति के सहभागी युवा वर्ग पर नियंत्रण कर के अहिंसक आंदोलन को नतीजे तक पहुंचाना अपने आप में एक इतिहास बन गया।
प्रोफेसर ने आह्वान किया कि देश वर्तमान में भी ऐसे ही संकट के दौर से गुजर रहा है इसमें सभी वर्ग जाति एवं समुदाय के लोगों को एकजुट होकर सत्ता के अघोषित आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए तैयार होना पड़ेगा तब जाकर आने वाली पीढ़ी को है एक नया भारत दे सकते हैं।
इसके पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीजी कॉलेज प्राचार्य रघुवंश मणि त्रिपाठी लोकनायक जयप्रकाश के संघर्षों के बारे में विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि  जयप्रकाश नारायण के अहिंसक आंदोलन से न सिर्फ युवा वर्ग ही प्रभावित देश के किसान मजदूर भी उनके आंदोलन से प्रभावित हुआ यही कारण है संपूर्ण क्रांति की सफलता में सब की भागीदारी रही। डॉक्टर त्रिपाठी संपूर्ण से संबंधित विभिन्न प्रकरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि जयप्रकाश नारायण के संबंध कहां थी से हर वर्ग प्रभावित रहा बावजूद इसके पूरे आंदोलन में कहीं भी हिंसा का रूप नहीं लिया। इतने बड़े लोकतांत्रिक देश में व्यापक पैमाने पर चलाए गए आंदोलन में हिस न होना अपने आप में उल्लेखनीय है। पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, चन्द्रभूषण मिश्र, पूर्व सांसद आलोक तिवारी आदि ने जे.पी. आन्दोलन के विविध सन्दर्भो को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के आयोजक लोकतंत्र सेनानी सेवा संस्थान बस्ती डॉ हरिओम श्रीवास्तव ने आए हुए आए हुए नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलदीप शुक्ल, विशिष्ट अतिथि के रूप में सूर्य कुमार सिंह ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया।  संगोष्ठी में मुख्य रूप से अनिल कुमार सिंह, श्रवण कुमार सिंह, सुधाकर शाही, मो. इब्राहिम, सिराज अहमद, देवेन्द्र प्रताप सिंह, रेखा रानी, सदानन्द शर्मा, सादिक अली, दुर्गा प्रसाद, देवनाथ पाठक, मंगल प्रसाद, रामचन्द्र, दयाराम, प्रेमनारायण, रसीद अहमद, विजय प्रकाश, ओंकार प्रसाद गुप्ता, धर्मेन्द्रनाथ द्विवेदी, दूधनाथ, हरि प्रसाद के साथ ही बड़ी संख्या में जे.पी. समर्थक विचारक उपस्थित रहे।