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बीमारियों से हो रही मौत के कारणों में तीसरे नंबर पर है सीओपीडी

– हर साल देश में पांच लाख से ज्यादा लोगों की हो रही मौत

– जागरूकता के लिए हर साल मनाया जाता है सीओपीडी दिवस

कबीर बस्ती न्यूज,बस्ती।उ0प्र0।

क्रॉनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) फेफड़े की एक प्रमुख बीमारी है, जिसे आम भाषा में क्रॉनिक ब्रोन्का trfइटिस भी कहते हैं। प्रतिवर्ष नवम्बर के तीसरे बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष के सीओपीडी दिवस की थीम ‘हेल्दी लंग्स: नेवर मोर इम्पोवर्टेन्ट’ है। कोरोना काल ने हमें हमारे एक जोड़ी फेफड़ों की अहमियत बता दी है।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि विश्व सीओपीडी दिवस का आयोजन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव लंग डिजीज (गोल्ड) द्वारा दुनिया भर में सांस रोग विशेषज्ञों और रोगियों के सहयोग से किया जाता है। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, विचार साझा करना और दुनिया भर में सीओपीडी के बोझ को कम करने के तरीकों पर चर्चा करना है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार सीओपीडी दुनिया भर में होने वाली बीमारियों से मौत का तीसरा प्रमुख कारण है। वर्ष 2019 में विश्व में 32 लाख लोगों की मृत्यु इस बीमारी की वजह से हो गयी थी वही भारत में लगभग पांच लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। अगर हम विश्व की दस प्रमुख बीमारी की बात करें तो सन् 1990 में यह छठवीं मुख्य बीमारी थी। अब यह तीसरे नंबर पर आ गई है। उनके पास 30-40 प्रतिशत मरीज हल्की या गंभीर सीओपीडी समस्या से ग्रसित आ रहे हैं।

क्या होते हैं लक्षण-
सीओपीडी की बीमारी में प्रारम्भ में सुबह के वक्त खांसी आती है, धीरे-धीरे यह खांसी बढ़ने लगती है, और इसके साथ बलगम भी निकलने लगता है। सर्दी के मौसम में खासतौर पर यह तकलीफ बढ़ जाती है। बीमारी की तीव्रता बढ़ने के साथ ही रोगी की सांस फूलने लगती हैा, और धीरे-धीरे रोगी सामान्य कार्य जैसे नहाना, धोना, चलना-फिरना, बाथरूम जाना आदि में भी अपने को असमर्थ पाता है।

कैसे करें रोग का परीक्षण
सामान्यत: प्रारंभिक अवस्था में एक्स-रे में फेफड़े में कोई खराबी नजर नहीं आती, बाद में फेफड़े का आकार बढ़ जाता है। इसका दबाव बढ़ने से दिल लम्बा और पतले ट्यूब की तरह (ट्यूबलर हार्ट) हो जाता है। इस रोग की सर्वश्रेष्ठ जांच स्पाइरोमेटरी (कम्प्यूटर के जरिए फेफड़े की कार्यक्षमता की जांच) या पीएफटी. ही है। गंभीर रोगियों में एबीजी के जरिए रक्त में ऑक्सीजन और कार्बन डाईआक्साइड की जांच की जाती है। कुछ रोगियों में सीटी स्कैन की भी आवश्यकता पड़ती है।

क्या है उपचार-
सीओपीडी  के उपचार में इन्हेलर चिकित्सा सर्वश्रेष्ठ है। चिकित्सक की सलाह से इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ठंड में दिक्कत बढ़ जाती है, इसलिए चिकित्सक की सलाह से दवा की डोज में परिवर्तन किया जा सकता है। खांसी व अन्य लक्षणों होने पर चिकित्सक के सलाहनुसार संबधित दवाइयां लें। खांसी के साथ गाढ़ा या पीला बलगम आने पर चिकित्सक की सलाह से एंटीबॉयटिक दवा ली जा सकती है। गम्भीर रोगियों में नेबुलाइजर, ऑक्सीजन व नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन (एनआईवी) का उपयोग भी किया जाता है।

कैसे करें बचाव-
– ध्रूमपान करना छोड़ दें।
– धूल, धुआं, गर्दा वाले वातावरण में कार्य न करें।
– महिलाएं लकड़ी, कोयला, उपले पर खाना न बनाएं।
– सर्दी से बचकर रहें। गर्म कपड़े पहनें।
– साबुन व पानी से नियमित हाथ धोते रहें।
– ठंडे पानी से स्नान न करें।
– सुबह के समय मार्निंग वॉक से बचें।
– सुबह के समय ठंडे पानी से हाथ न धोएं।
– एक-दूसरे से हाथ मिलाने से बचें।