Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
भाजपा की सरकार में उपेक्षित हैं विश्वकर्मा समाज के लोग-राम आसरे विश्वकर्मा 700 से अधिक वादकारियों ने सीएम को भेजा पत्र, त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए प्रभावी कार्रवाई कराने ... जयन्ती पर याद किये गये पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चौधरी अजित सिंह कुपोषण और एनीमिया से बचाव के लिए कृमि मुक्ति की दवा का सेवन अनिवार्य-सीएमओ पूजन अर्चन के साथ भगवान श्रीराममय हुआ कैली का डायलसिस यूनिट योगी सरकार के जीरो टेलरेंस नीति पर खौलता पानी डाल रही है बस्ती पुलिस सम्पूर्ण समाधान दिवस में 98 मामलें में 06 का निस्तारण जेण्डर रेसियों बढाने के लिए घर-घर सर्वे करके भरवायें मतदाता फार्म: मण्डलायुक्त डीएम एसपी से मिले अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य, संचालित योजनाओं पर चर्चा भाजपा नेता बलराम ने किया पब्लिक डायग्नोसिस सेन्टर के जांच की मांग

परमात्मा जिसे मारते हैं उसे तारते भी हैं- प्रणवपुरी

11 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा

कबीर बस्ती न्यूज:

बस्ती: राम वियोगी का जीवन कैसा होना चाहिये इसका आदर्श जगत के समक्ष भरत ने प्रस्तुत किया। ‘‘सुनहुं उमा ते लोग अभागी। हरि तज होहिं विषय अनुरागी।। जब तक ईश्वर से जीव की मैत्री नहीं हो जाती जीवन सफल नहीं होता। कृष्ण और काम, राम और रावण एक साथ नहीं रह सकते। रामचन्द्र जी ने सुग्रीव को अपना मित्र बनाया क्योंकि सुग्रीव को हनुमान जी ने अपनाया है। ईश्वर के साथ प्रेम करना है तो दूसरों का प्रेम छोड़ना पड़ेगा। यह सद् विचार कथा व्यास स्वामी प्रणवपुरी जी महाराज महामृत्यंुजय पीठाधीश्वर उज्जैन ने गोटवा कटया में सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम चौधरी द्वारा आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा के सातवें दिन व्यक्त किया।
राजा दशरथ का श्रीराम वियोग में निधन, श्रीराम का चित्रकूट में प्रवेश, सीताहरण, श्रीराम हनुमान का मिलन, शबरी प्रसंग, बालि बध सहित अनेक प्रसंगो का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी  ने कहा कि हनुमान जी को कौन उपदेश दे सकता है, वे तो सकल विद्या के आचार्य है। पंचवटी का अर्थ है पांच प्राण, परमात्मा पांच प्राणों में विराजमान हैं। संसार वन में भटकने वाले को वासना रूपी शूर्पणखा मिल जाती है किन्तु राम तो उस ओर देखते ही नही।
महात्मा जी ने कहा कि किसी उलझन के समय जीव से परामर्श करना अच्छा है किन्तु ईश्वर से परामर्श तो अति उत्तम है। श्रीराम के तप से भरत का त्याग कम नहीं है। उनका प्रेम तो ऐसा प्रबल है कि जड़ पादुका भी चेतन हो गयी। जनम-जनम मुनि जतन कराही। अन्त राम कहि आवत नाहीं।। साधारण मनुष्य और परमात्मा में यही अन्तर है कि परमात्मा जिसे मारते हैं उसे तारते भी हैं। श्रीराम अति सहज है। निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।। वे शरणागत की रक्षा करते हैं। रावण के अत्याचारों से त्रस्त होकर विभीषण जब श्रीराम के शरण में आये तो उन्होने विभीषण को गले लगा लिया ।
सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम चौधरी ने सपरिवार व्यास पीठ का विधि विधान से पूजन किया। मुख्य रूप से शिव श्याम चौधरी, घनश्याम चौधरी, कृष्णा चौधरी, ओंकार मिश्र, सहदेव दूबे, हरि प्रसाद मिश्र, कैलाश मिश्र, अमरेश पाण्डेय, शिवशंकर मिश्र, राजाराम गुप्ता, हनुमान गुप्ता, राम प्रकाश पाण्डेय के साथ ही अनेक श्रद्धालुओं ने श्रीराम कथा का आनन्द लिया।