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अराजकता व अपराध के आग मे झुलस रहा है बस्ती का रेलवे स्टेशन

– जीआरपी पुलिस, आरपीएफ और पुरानी बस्ती पुलिस के संरक्षण खुलेआम हो रहा है अपराध

-यात्रियों, वाहन चालकों के साथ मारपीट कर अराजक तत्व करते अवैध धन उगाही

अवैध धन उगाही से विभागों को होती है लाखों की कमाई फिर अराजक तत्वों पर कौन करे कार्यवाही

रिर्पोट- रंजीत उपाध्याय

कबीर बस्ती न्यूज

बस्ती। प्रदेश सरकार के मुखिया योगी जी के जीरो टेलरेंश नीति को अगर देखना है तो रेलवे स्टेशन बस्ती आ जाईए। जहां कानून व्यवस्था का कहीं नमो निशान तक नही है। बस्ती का रेलवे स्टेशन अराजकता और अपराधों के आग मे झुलस रहा है। कार्यवाही करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अपनी तिजोरी भरने मे मस्त है। अगर नाजायज वसमली नही होगी तो अकूत धन कहां से आयेगा। जिम्मेदार अधिकारी यात्रियों के सुरक्षा के लिए नही बल्कि अराजक तत्वों को धंधें मे बढावा देने मे सहयोग करना और उनकी सुरक्षा करना है। जिले मे यह कौन नही जानता कि बस्ती रेलवे स्टेशन पर बडे पैमाने पर अवैध वसूली कैसे होती है। जानते तो सब हैं लेकिन हालात यह हैं कि बिल्ली के गले मे घण्टी बांधेगा कौन ? स्टेशन पर दो दर्जन से अधिक अराजक तत्व नशेडी टाइप के लोग हैं जो यात्रियों, टेम्पो चालकों तथा टेक्सी चालकों से मारपीट कर 200 से 500 रूपये तक की जबरिया वसूली करते है। यह अराजक तत्व चैबीस घण्टे कोकीन, चरस, स्मैक व गांजा आदि के नशे मे धुत रहते हैं। अगर कोई रूपये देने से मना करता है तो यह लोग उसके साथ मारपीट भी करते है। यदि कोई यात्री थाने मे शिकायत भी करता है तो पुलिस कार्यवाही करने के बजाय अराजक तत्वों को ही संरक्षण प्रदान करती है और पीडित को ही डरा धमका कर भगा देती है। अराजक तत्वों को संक्षण प्रदान करने मे जीआरपी पुलिस, आरपीएफ और पुरानी बस्ती पुलिस साथ ही कुछ तथा कथित पत्रकार और जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। बताया तो यहां त जा रहा है जीआरपी पुलिस का एक सिपाही जिसका नाम विजय यादव बताया जा रहा है उसी के निर्देश पर अवैध धन उगाही बदस्तूर जारी है मगर इस समय यह सिपाही की पोस्टिग कही और हैं जहां से बैठ कर यह साम्राज्य चला रहा है।
सूत्र बताते हैं कि एक दिन मे कम से कम 5 से 600 टेम्पो व टेक्सी व प्राईवेट वाहनों का आना जाना होता है प्रत्येक वाहन से 200 से 500 तक वसूली लाठी के दम पर की जाती है। इस हिसाब से से प्रतिदिन एक लाख से अधिक की नाजायज वसूली हो जाती है नाम न छापने के शर्त पर शूत्रों ने बताया कि जीआरपी पुलिस, आरपीएफ और पुरानी बस्ती पुलिस की प्रतिमाह मोटी कमाई होती है। इस लिए अराजक तत्वों पर कार्यवाही करने की हिम्मत किसी मे नही है।
स्टेशन पर अवैध धनउगाही की सूचना मोबाइल पर मिलने पर एक वरिष्ठ पत्रकार स्टेशन पहुंचे वहां मौजूद एक दर्जन से अधिक अराजक तत्वों ने उन पर प्राण घातक हमला करने के लिए घेर लिया। अच्छा तो यह हुआ कि पत्रकार स्थिति की नजाकत को देखते हुए वहां से जाने मे ही अपनी भलाई समझी। और घटना के सम्बन्ध मे सीओ सिटी को ज्ञापन देकर उन अराजक तत्वों के विरूद्व कडी कार्यवाही करने की मांग किया। इस घटना को लेकर जिले के सभी पत्रकारों मे काफी आक्रोश हैं।