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गौ आधारित प्राकृतिक खेती की तकनीक’’ विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण

कबीर बस्ती न्यूजः

बस्ती : कृषि विज्ञान केन्द्र, बंजरिया पर प्राकृतिक खेती का विस्तार योजना के अन्तर्गत ‘‘गौ आधारित प्राकृतिक खेती की तकनीक’’ विषय पर 07 से 08 फरवरी को दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षणार्थियों को सम्बोधित करते हुए केन्द्र के प्रभारी अधिकारी, डा0 डी0के0 श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में शीघ्र ही हम लोगों को रासायनिक खेती को छोडकर जैविक एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होना पडेगा, क्योंकि रासायनिक दवाओं एवं खादों के मूल्य दिन प्रति दिन बढते ही जा रहे है।
उन्होने बताया कि प्राकृतिक खेती का मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों की लागत में कमी करके उनकी आय में बृद्धि करना है। प्राकृतिक खेती में गौ मूत्र, मल एवं उनसे तैयार किये गये कीटनाशी एवं रोगनाशी का ही प्रयोग किया जाता है, जिसके लिए किसान भाईयों को भारतीय मूल की गायों का पालन करना पडेगा।
प्रशिक्षण समन्वयक डा0 वी0बी0 सिंह, वैज्ञानिक जी0पी0बी0 ने प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को बीजामृत, जीवामृत एवं घनजीवामृत का उपयोग एवं उनके तैयार करने की विधि का विस्तार से वर्णन किया। उन्होने बताया कि जो किसान भाई बीजामृत, जीवामृत एवं घनजीवामृत बनाकर अपने खेतों में प्रयोग कर रहे है, उनको काफी लाभदायक सिद्ध हुआ है। डा0 सिंह ने बताया कि जीवामृत देशी गाय के गोबर, गौ मूत्र के साथ गुड, वेसन, जीवाणुयुक्त मिट्टी के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
केन्द्र के पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डा0 प्रेम शंकर ने बताया कि बीजामृत से बीज का शोधन किया जाता है। उन्होने कहा कि यदि बीजामृत को बीजों का अमृत कहा जाये तो कोई अतिसयोक्ति नही होगी। साथ ही साथ फसलों में लगने वाले बीज जनित रोगों जैसे गेंहॅू का अनावृत कंडुवा रोग, धान का आभासी कण्ड रोग आदि से बचाव किया जा सकता है।
डा0 अंजलि वर्मा, वैज्ञानिक गृह विज्ञान ने बताया कि जीवामृत बनाने के लिए 200 ली0 क्षमता का प्लास्टिक का ड्रम, 10 किग्रा0 गोबर, 10 ली0 गोमूत्र, 2 किग्रा0 गुड, 1 किग्रा0 वेसन, 1 किग्रा0 सजीव मिट्टी एवं 200 ली0 पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में निखिल सिंह, जे0पी0 शुक्ल, प्रहलाद सिंह, योगेन्द्र सिंह, अविनाश सिंह, बनारसी लाल सिंह सहित जनपद के 40 कृषकों ने प्रतिभाग किया, जिन्हे फलदार पौध वितरित किया गया।