वाह रे स्वास्थ्य विभागं……..गोरखपुर लखनउ दिल्ली से अल्ट्रासाउंड करने प्रतिदिन बस्ती आते हैं कथित डाक्टर
– सीएमओ कार्यालय मे डाक्टरों के पेपर को लेकर हो रहा है बडा खेल, मुन्नाभाई करते हैं अल्ट्रासाउंड
– मरीज मरे या भाड मे जाये विभाग को नही है इससे मतलब, स्वास्थ्य माफियाओं पर बरस रही है साहब की कृपा
– कथित डाक्टरों के पेपरों की हो जाये जांच तो उजागर हो जायेगा विभागीय खेल
रिर्पोट- रंजीत उपाध्याय
कबीर बस्ती न्यूज
बस्ती। स्वास्थ्य विभाग के निगहबानों की कृपा दृष्टि से जिले के पीसीपीएनडीटी के तहत पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेन्टरों या यूं कहें कि स्वास्थ्य माफियाओं की स्थिति बल्ले- बल्ले है। क्योंकि ऐसे अल्ट्रासाउंड सेन्टरों पर मरीज व उनके परिजन हर दिन ठगे और लूटे जाते हैं यहां तरीका लूटने का थोडा अलग है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि गोरखपुर लखनउ यहां तक कि दिल्ली के चिकित्सकों का पेपर यहां अल्ट्रासाउंड सेन्टरों मे लगा कर धोखाधडी का बडा ही घिनौना खेल खेला जा रहा है इतना ही नही बल्कि इस घिनौने खेल मे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी अहम भूमिका निभाने मे पीछे नही हैं। विभाग और स्वास्थ्य माफियाओं के गठजोड व तिलिस्मि को डीएम भी नही समझ पा रही हैं। यह जानकार आपकों हैरानी होगी प्रतिदिन बस्ती जिले मे अल्ट्रासाउंड करने डाक्टर गोरखपुर, लखनउ, यहां तक कि दिल्ली से आते हैं। जिले के कुदरहा मे गोरखपुर के डाक्टर का फर्जी पेपर से संचालित आकृति डायग्नोस्टिक सेन्टर अबाध गति से चलाया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी माफियाओं को अपनी मौन स्वीकृति प्रदान कर चुके हैं। बताया जा रहा है आकृति डायग्नोस्टिक सेन्टर पर अल्ट्रासाउंड करने रोज गारखपुर से डाक्टर साहब कुदरहा आते हैं। विभाग और स्वास्थ्य माफियाओं द्वारा बनाया गया यह चोर रास्ता मासूम मरीजों पर भारी पड रहा है। लगभग 14- 15 अल्ट्रासाउंड सेन्टरों को छोडकर लगभग 120 अल्ट्रासाउंड सेन्टर कथित डाक्टरों के फर्जी पेपर लगा कर अप्रशिक्षित लोगों द्वारा चलाये जा रहे हैं। ऐसा नही है कि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नही है जानकारी पूरी है। लेकिन निजी लाभ के नाते कार्यवाही शून्य है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिले मे लगभग 130 अल्ट्रासाउंड सेन्टर पंजीकृत हैं। जिसमे लगभग 14- 15 अल्ट्रासाउंड सेन्टर ऐसे हैं जहां प्रशिक्षित चिकित्सक स्वयं अल्ट्रासाउंड करते हैं। यहां से सुविधा शुल्क के नाम पर विभाग को एक चवन्नी भी नही मिलता। क्योंकि यहा धांधली बिल्कुल भी नही है। बाकी 115 अल्ट्रासाउंड सेन्टरों पर गोरखपुर, लखनउ, दिल्ली के चिकित्सकों का पेपर लगाकर विभागीय गठजोड से झोलाछाप टाइप के लोग कभी भी अल्ट्रासाउंड करते देखे जा सकते हैं। बताया तो यहां तो यहां तक जाता है कि यह कटिया कनेक्शन आज से नही बहुत पहले से चलता चला आ रहा है। वैसे भी न तो विभाग को मरीजों के हित से मतलब है और न स्वास्थ्य माफियाओं को। कुल मिला कर यही है कि सैंया भये कोतवाल तो डर काहै का।
इस सम्बन्ध मे सीएमओ राजीव निगम ने कहा कि प्रकरण अति गंभीर है इसकी गहरायी से जांच करा कर बिना पंजीकृत चिकित्सक के संचालित हो रहे सेंन्टरों को सील कर पंजीकरण निरस्त करने की कार्यवाही की जायेगी।

