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फाइलेरिया से बचने के लिए साल में एक बार लगातार पांच साल करें  दवा का सेवन

ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित कर मुख्य संदेश पहुंचाने की अपील
12 मई से शुरू होकर 10 दिनों तक चलेगा एमडीए अभियान
घर-घर जाकर अपने सामने दवा खिलाएंगी टीम
कबीर बस्ती न्यूज:
गोरखपुर: फाइलेरिया से बचने के लिए पांच साल तक लगातारसामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) के तहत हर साल चलाये जाने वाले अभियान के दौरान सभी के लिए दवा का सेवन अनिवार्य है । यह दवा सिर्फ दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती व गंभीर तौर पर बीमार लोगों को नहीं खानी है। मधुमेह, ब्लड प्रेशर, थायराइड, अर्थराइटिस जैसी बीमारियों के मरीज दवा ले सकेंगे । ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित कर यही मुख्य संदेश प्रसारित करने की अपील की जा रही है । जिले में 12 मई से शुरू होकर 10 दिनों तक एमडीए कैंपेन चलेगा जिसमें घर-घर जाकर अपने सामने स्वास्थ्य विभाग की टीम फाइलेरिया की दवा खिलाएंगी ।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के जीवाणु दस से पंद्रह साल बाद और कभी-कभी बीस साल बाद लक्षण प्रदर्शित करते हैं । इस बीमारी के लक्षणों में हाथ, पैर, स्तन में सूजन, हाइड्रोसिल, पेशाब में जलन प्रमुख तौर पर हैं। हाइड्रोसिल की तो राजकीय अस्पतालों में निःशुल्क सर्जरी हो जाती है लेकिन हाथीपांव का फाइलेरिया मरीज ठीक नहीं हो पाता है । उसका जीवन बोझ बन जाता है। ऐसे मरीजों को चार-चार महीने के अंतराल पर 12 दिन तक निःशुल्क दवा दी जाती है ताकि उसकी बीमारी की जटिलताएं न बढ़ें और हाथीपांव में ठहराव आ जाए । ऐसे मरीजों को मार्बिडिटी मैनेजमेंट किट देकर समझाया जाता है कि सूजन व घाव का प्रबंधन करने से दिक्कत नहीं होगी । फाइलेरिया की अगर समय से पहचान हो जाए तो यह बीमारी ठीक भी हो सकती है ।
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया का वाहक क्यूलेक्स मच्छर गंदे पानी में पनपता है । यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फाइलेरिया का संक्रमण फैलाता है । इस मच्छर से बचाव के सभी उपाय करने चाहिए, लेकिन साथ में हर हाल फाइलेरिया रोधी निःशुल्क दवा डीईसी और एल्बेंडाजॉल का सेवन खाना खाने के बाद अवश्य करना चाहिए । दवा खाने के बाद जिन लोगों के भीतर फाइलेरिया के जीवाणु मौजूद होंगे उन्हें कुछ प्रतिकूल प्रभाव जैसे उल्टी, मिचली, चक्कर आना आदि आ सकते हैं, लेकिन इससे घबराना नहीं है । ऐसा तब होता है जबकि फाइलेरिया के जीवाणु खत्म हो रहे होते हैं । ऐसे लोगों की मदद के लिए सभी ब्लॉक पर रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) गठित की जा रही है ।
श्री सिंह ने बताया कि अभियान वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ एके चौधरी की निगरानी में चलेगा । इस दौरान दवा खिलाने के लिए बनायी गयी एक टीम को 25 घर जाकर प्रतिदिन दवा खिलानी है । बुधवार, शनिवार और रविवार को यह अभियान नहीं चलेगा । एक टीम में दो सदस्य होंगे और दोनों को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 125 रुपये भी दिये जाएंगे । अभियान के बाद एक मॉप अप राउंड चलेगा जिसमें छूटे हुए लोगों को दवा खिलाई जाएगी । दवा न लेकर रखना है और न ही अपने मन से खाना है। इसका सेवन स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही करना है ।
मरीज भी खोजे जाएंगे
घर-घर दवा खिलाने के अभियान के दौरान हाथीपांव और हाइड्रोसील के मरीज भी खोजे जाएंगे। एप के जरिये प्रतिदिन के अभियान की रिपोर्टिंग होगी । प्रत्येक पांच से छह टीम पर एक सुपरवाइजर लगाए जाएंगे। डब्ल्यूएचओ, पाथ, पीसीआई और सीफॉर जैसी संस्थाएं अभियान में सहयोग प्रदान करेंगी । समुदाय से अपील है कि स्वास्थ्यकर्मी उनके घर जाएं तो उनके सामने दवा का सेवन अवश्य करें ।
 
डॉ आशुतोष कुमार दूबे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी