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जिला जेल के लिए शनि की साढेसाती बना कारागार का सिपाही सचिन

 12 साल के नौकरी मे पांच बार विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि तथा एक बार हो चुका है सस्पेंड

अपने निजी स्वार्थों को पूरा कराने के लिए जेल अधिकारियों पर बनाता है दबाव

सिपाही का अपराधियों से सांठ-गांठ की गतिविधियों से है जेल प्रषासन हलकान

कबीर बस्ती न्यूज।

बस्ती। जिला कारागार मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टेलरेंस नीति पर यहां तैनात एक कारागार सिपाही सचिन श्रीवास्तव भारी पड रहा है। इस सिपाही के करतूतों से जेल के स्थानीय अधिकारी भी हलकान हैं। जेल मैनुअल के विपरीत गतिविधियों मे शामिल होकर यह सिपाही जेल के शान्ति व्यवस्था को लगातार चुनौती देता आ रहा। अगर भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो कारागार सिपाही सचिन श्रीवास्तव के जेल मैनुअल के विरूद्व गतिविधियों मे संलिप्तता प्रमाधित होने पर उसे पांच बार विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि तथा एक बार सस्पेंड भी किया जा चुका है। कारागार विभाग के इतनी कार्यवाहियों के बाद भी इस सिपाही के कर्मचारी आचरण सुधार नही हो रहा है। जिसे लेकर जेलर से लेकर जेल अधीक्षक तक हैरान व परेषान हैं। यह कहना गलत न होगा कि यह सिपाही बस्ती जिला जेल के लिए किसी शनि की साढेसाती से कम नही है। ष्

सूत्रों के अगनुसार सिपाही सचिन श्रीवास्तव के पिता वीरेन्द्र लाल श्रीवास्तव बस्ती मे ही लम्बी सेवा के बाद बस्ती जिला जेल से जेल वार्डर के पद से रिटायर हुए। सचिन श्रीवास्तव भी अपने पिता के साथ लम्बे अर्से से रहा है। उसकी षिक्षा-दीक्षा भी बस्ती से ही पूरी हुर्इ्र। जिससे सचिन का जनप्रतिनिधियों तथा अनेकों स्थानीय असामाजिक तत्वो से बेहतर ताल्लुकात रहा।

12 साल के नौकरी मे जेल के लिए ही संकट बन गया सचिन

कारागार के सेवा मे वर्ष 2010 आने के बाद अवकाष व डियूटी आदि मे अपनी मनमानी करने के लिए जेल अधिकारियों पर उन्हीं  जनप्रतिनिधियों से दबाव बनवाता रहा। इतना ही नही जेल अधिकारियों को प्रेषर मे लेने के लिए सिपाही सचिन श्रीवास्तव अपने ही अधिकारियों के विरूद्व झूठी व मनगढन्त स्वांग रचकर शासन को षिकायत भी कराता। जिसकों लेकर करागार का माहौल दूषित हो जाता तथा जेल की छबि धूमिल होती। ऐसी स्थिति मे जेल के अन्दर कर्मियों मे ही टकराहट की स्थिति पैदा हो जाती। बस्ती जेल मे सचिन की तैनाती मई 2018 से है।

सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि सिपाही सचिन श्रीवास्तव दूसरे से फर्जी षिकायत कराकर उसे अखबारों मे छपवाता तथा चैनलों मे प्रसारित कराता। इतना ही नही बल्कि यह सिपाही जेल मे बन्द अपराधियों तथा अवांछनीय गतिविधियों मे शामिल लोगों को आपत्तिजनक चीजें भी मुहैया कराता। जेल के अन्दर की गतिविधियों की तस्वीरें व वीडियो लीक कर अनाप-षनाप खबरें चलवाता। बताया तो यहां तक जाता है कि वह जेल मे निरूद्व शातिर अपराधियों से मेलजोल व उनके घरों तक आना जाना होता था। बताया जाता है कि सिपाही सचिन श्रीवास्तव की गोण्डा मे तैनाती के दौरान स्पाई कैमरा अन्दर ले जाकर दृष्यों का फोटो व वीडियो बनाकर वायरल करने के मामले मे इस निलम्बित भी किया जा चुका है। बताते हैं कि 12 साल की नौकरी मे सचिन श्रीवास्तव पांच बार विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि भी प्राप्त कर चुका है। बताते हैं कि वर्ष 2019 मे बस्ती जेल मे एक बन्दी को मोबाइल पहुंचाने का आरोप कारागार सिपाही सचिन श्रीवास्तव पर प्रमाणित हुआ। इस मामले मे उसे परिनिन्दा प्रविष्टि मिला।

आईजी कारागार का सीयूजी नम्बर मिला बन्द

इस सम्बन्ध मे आईजी कारागार आनन्द कुमार का पक्ष लेने के लिए उनके सीयूजी नम्बर 9454418151 पर सम्पर्क करने का प्रयास किया किया गया लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला।

क्या कहते हैं प्रभारी जेल अधीक्षक कमलेष चन्द्र बाजपेई-

प्रभारी जेल अधीक्षक कमलेष चन्द्र बाजपेई ने बताया कि यह सही है कि कारागार सिपाही सचिन श्रीवास्तव एक षडयंत्रकारी एवं कर्मचारी नियमावली के बिपरीत मानसिकता रखने वाला व्यक्ति है। उसे उसके कृत्यों के लिए अनेकों बार दण्ड तथा निलम्बित किया जा चुका है फिर भी अपनी आदतों से वह बाज नही आ रहा है। वह अपने कृत्यों से कारागार के आन्तरिक व्यवस्था पर क्षति पहुंचाने के साथ ही जेल की छबि धूल धूसरित करने का कृत्य कर रहा है। अन्य मामले की जांच अभी प्रचलित है जांच रिर्पोट आते ही उसके विरूद्व कार्यवाही की जायेगी।