Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
अवैध वसूली का प्रतिदिन लाखों रूपया गटक रहा है आबकारी विभाग व ठेकेदार, जिम्मेदार बने अन्जान डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के बस्ती आगमन पर हुए खर्च का नटवरलाल स्टेनो ने विभाग मे शुरू किया अवैध वसूली ... बिना न्यूरो सर्जन के डा0 प्रमोद चौधरी ने किया महिला के सिर का आपरेशन, हो गयी थी मौत वाह रे स्वास्थ्य विभागं........गोरखपुर लखनउ दिल्ली से अल्ट्रासाउंड करने प्रतिदिन बस्ती आते हैं कथित ... गैंगरेप के आरोपियों को नगर पुलिस दे रही है खुला संरक्षण नशेडियों व अपराधियों के आगे नतमस्तक हुई पुरानी बस्ती पुलिस, एक माह के बाद भी नही दर्ज हुआ मुकदमा मरीजों के जीवन के लिए वरदान साबित हो रहा है मरियम हार्ट एवं मल्टीस्पेशलटी हास्पिटल इंस्पेक्टर शांशक शेखर राय ने संभाला थाना पुरानी बस्ती का कार्यभार रेलवे स्टेशन पर लोगों से मारपीट करने वाले दो अराजक तत्व गिरफ्तार अराजकता व अपराध के आग मे झुलस रहा है बस्ती का रेलवे स्टेशन

संविदा कर्मियों को बडी राहत: कोर्ट ने रद्द कर दिया राज्य सरकार के सेवा समाप्ति का आदेश

कबीर बस्ती न्यूज:

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में संविदा पर तैनात कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए उनके सेवा समाप्ति के आदेशों को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने अक्तूबर 2020 से विभिन्न तिथियों पर जारी इन आदेशों को मनमाना करार दिया है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने यह अहम फैसला संविदाकर्मियों की ओर से दाखिल सात याचिकाओं पर दिया।

याचिकाओं में कहा गया था कि 27 अक्तूबर 2017 को राज्य सरकार ने शासनादेश जारी किया। इसके तहत सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पैरा मेडिकल स्टाफ व नॉन पैरा मेडिकल स्टाफ  के पदों को संविदा के जरिए भरने का निर्णय लिया गया।

इस क्रम में 15 दिसंबर 2017 को विज्ञापन भी जारी किया गया। याचियों ने आवेदन किया और चयनित होने पर नियुक्ति पाई। 26 मार्च 2019 को आयुष विभाग के सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी संविदाकर्मियों को उनकी सेवा अवधि समाप्त होने पर कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया।

हालांकि आवश्यकता को देखते हुए 6 जुलाई 2019 को फिर याचियों की संविदाओं का नवीनीकरण कर दिया गया। मगर इस बार उनके संविदाओं की अवधि समाप्त होने पर अक्तूबर 2020 से अलग-अलग तिथियों पर आदेश जारी करते हुए उन्हें कार्य मुक्त कर दिया गया। इसे याची संविदाकर्मियों ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने उक्त आदेश के साथ याचिकाएं मंजूर कर लीं।